नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने राज्यसभा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) के तहत न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की मांग की है। उन्होंने सरकार पर इस योजना की अनदेखी करने और इसे कमजोर करने का आरोप लगाया।
मनरेगा (MNREGA) मजदूरी पर सोनिया गांधी की चिंता
सोनिया गांधी ने संसद में कहा कि ग्रामीण भारत में लाखों लोग मनरेगा (MNREGA) पर निर्भर हैं, लेकिन सरकार द्वारा इस योजना को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण मजदूरों को उनके श्रम का सही मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।
मनरेगा (MNREGA) बजट अपर्याप्त!
सोनिया गांधी ने बजट आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि मनरेगा (MNREGA) के लिए सरकार का बजट नाकाफी है। ग्रामीण मजदूरों की संख्या और महंगाई बढ़ने के बावजूद मजदूरी में कोई बड़ी वृद्धि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार सच में गरीबों और ग्रामीण मजदूरों की चिंता करती है, तो उसे इस योजना के बजट को बढ़ाना चाहिए और मजदूरी दरों में संशोधन करना चाहिए।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा (MNREGA) को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना की वजह से लाखों ग्रामीणों को रोजगार मिला है, लेकिन सरकार इसकी अनदेखी कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार मजदूरी नहीं बढ़ाती है, तो गरीब मजदूरों की स्थिति और खराब हो सकती है।
मनरेगा (MNREGA) मजदूरी क्यों बढ़ानी चाहिए?
- महंगाई दर में वृद्धि – महंगाई बढ़ने के बावजूद मजदूरी में पर्याप्त वृद्धि नहीं की गई है।
- रोजगार का मुख्य जरिया – ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों लोग मनरेगा पर निर्भर हैं।
- गरीबी उन्मूलन में सहायक – यह योजना गरीब तबके के लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।
- आजीविका के साधन को मजबूत बनाना – न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि से ग्रामीणों का जीवनस्तर सुधर सकता है।
विपक्ष का समर्थन
सोनिया गांधी की इस मांग को विपक्ष के अन्य नेताओं का भी समर्थन मिला है। उन्होंने भी सरकार से अपील की है कि ग्रामीण मजदूरों की दयनीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए मजदूरी में बढ़ोतरी की जाए।
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