कुरीतिमुक्त समाज की अवधारणा:

समाज मैं फैली कुरूतियों (condemnable practices) को दूर करने का प्रयास हर दिशा से हो और समाज का हर व्यक्ति इसमें बराबर की भागीदारी  करे तो निश्चित ही हमारे समाज मैं फैली कुरूतियों से निपटने मैं न सिर्फ सफलता मिलेगी बल्कि समाज के उत्थान मैं लिया गया ये कदम एक मील का पत्थर साबित होगा.

वैसे तो हमारा समाज समय के साथ बहुत बदलाव करता आया है और न सिर्फ देश मैं अपितु विदेशों मैं भी जाट समाज के बच्चों ने विभिन्न क्षेत्रों मैं अपने समाज का डंका बजवाया है. बात शिक्षा की हो, खेल की, बिजनेस की, राजनीति की या फिर बात हो सरकारी और प्राइवेट नौकरियों की आपको जाट हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते नजर आएंगे, फिर चाहे इंजीनियरिंग हो या मैनेजमेंट, मेडिकल सर्विसेज या सिविल सर्विसेज, जुडिशरी हो या फिर देश सेवा के लिए प्राणो का बलदान करने से न चूकने वाले वीर सैनिकों की, जाट हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा दिखता नजर आएगा.

परन्तु, विकास के पथ पर आगे बढ़ चले जाट समाज मैं आज भी कुछ कुरीतियां देखने को मिल रही हैं जिसका समाधान बहुत आवशयक है और इसके लिए सबका साथ मैं आना बहुत जरूरी है

  1. आज जरूरत है की समाज मैं कन्या भ्रूण हत्या पर चर्चा हो और समाज को इसपर जागरूक किया जा सके
  2. आज बेटियों की उच्च शिक्षा पर विशेष बल देने की जरूरत है ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या मैं बेटियां शिक्षित हो सकें
  3. आज समाज को आडम्बर से मुक्त दहेज़ रहित विवाह की पहल करनी चाहिए ताकि समाज मैं एक सामान माहौल बन सके
  4. आज समाज को जरूरत है नशे के बारे मैं बात करने की क्योंकि ये जहर धीरे धीरे युवानों को अपनी गिरफ्त मैं ले रहा है और कोई भी समाज बिना युवानों के कैसे आगे बढ़ सकता है
  5. आधुनिकता की दौड़ मैं अपने खेत खलिहानो को बेचकर धरती विहीन होते हुए समाज के भूमिपुत्रों को जगाने के प्रयास की भी जरूरत है
  6. आज जरूरत है की तपती दुपहरी और गलाती ठण्ड मैं भी मेहनत कर के अनाज उगाने वाले अन्नदाता को ये बताने की छोटी छोटी बात पर थाने और कचहरी मैं अपना सब कुछ व्यर्थ गवाने से अच्छा है कि सामूहिक सौहार्द के साथ मसलों का निपटारा करना सीखें
  7. आज के समय मैं मृत्युभोज को किसी भी रूप से उचित नहीं ठहराया जा सकता और जरूरत है कि इस रिवाज मैं जरूरी बदलाव किये जाएं जिससे इसपर होने वाले अतार्किक व्यय को रोका जा सके

महाराज सूरजमल स्मृति न्यास अपने जाट समाज मैं व्याप्त इन कुरीतियों (condemnable practices) की समाप्ति के लिए प्रयास जारी रखेगा और आशा है की समस्त सरदारी इस उद्देश्य मैं अपना अमूल्य योगदान अवश्य देंगे.

समाज के कार्यों में सहयोग की भावना जागृत करना

किसी भी समाज उत्थान के लिए जरूरी है कि समाज के समर्थवान व्यक्तियों मैं समाज के कार्यों के लिए सहयोग की भावना जागृत होना तभी एक समाज अपने गौरवमयी इतिहास कि नींव पर एक मजबूत किले कि संरचना कर सकता है जिसके परिणाम स्वरुप भावी पीड़ी के लिए एक सही पथ का सृजन हो पाता है.

इसके लिए जरूरी है कि समाज के सम्मानित व्यक्तियों को निम्न बिंदुओं पर ध्यान देते हुए समाज की कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जाये.

संस्कृति और परंपरा का संरक्षण:

  • लोक कला, संस्कृति, और परंपरा को बढ़ावा देना
  • समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण प्रदान करना
  • अपने समाज की स्मृतियों और संस्कृति का सम्मान करना साथ ही अगली पीढ़ी को समाज के संस्कार सिखाना

आर्थिक विकास और रोजगार: 

  • आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को उसकी कार्य योग्यता के अनुसार सहायता प्रदान करना
  • रोज़गार के अवसर बढ़ाने के लिए योजना बनाना
  • ग्राम लेवल पर लघु समितियां बनाकर उनको स्वरोजगार उपलब्ध कराना 

समाज को शिक्षित बनाना:

  • शिक्षा को महात्व दें, क्यों कि ये समाज में सुधार लाने का एक मूल मंत्र है
  • लोगों को सामाजिक रूप से जागृत करने का प्रयास करना, जिससे कि नयी पीढ़ी को बेहतर विकल्प चुनने मैं मदद मिले

सामाजिक संबंध और सहयोग:

  • समाज में एक दूसरे के साथ मेल-जोल बढ़ाना
  • सामाजिक संबंध को मजबूत बनाए रखने की परिपाटी डालना, ताकी लोग एक दूसरे की मदद कर सकें

राजनीति में भागीदारी:

  • लोकतंत्र में समाज की भागीदारी को बढ़ावा देना तथा सही व्यक्ति को राजनीति में आगे बढ़ाना और वो समाज के उत्थान के लिए कार्य करे ये सुनिश्चित करना
  • समाज में सुधार लाने के लिए सशक्त नेता को चुनने का प्रयास करना

मीडिया का प्रभाव:

  • मीडिया का सही इस्तेमाल समाज को जागृत करने में और उनके दृष्टिकों को बदलने में किया जाना चाहिए
  • समाज में समृद्धि और प्रगति को बढ़ने वाले कार्यक्रमों का प्रमोशन हो और उनको विभिन्न संचार माध्यमों के द्वारा समाज मैं प्रस्तुत करना चाहिए

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