मेलबर्न टेस्ट: ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान को दी पटखनी

मेलबर्न टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने चौथे दिन ही पाकिस्तान को 79 रन से धूल चटा दी, शुक्रवार को पाकिस्तान दूसरी पारी में महज 237 रन पर ऑल टीम आउट हो गया। पाक कप्तान शान मसूद और आगा सलमान ने अर्धशतक लगाकर कुछ साहस दिखाया लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके।

वहीं ऑस्ट्रेलिया के लिए पहली इनिंग में पांच विकेट लेने वाले टीम के कप्तान पैट कमिंस दूसरी पारी में भी पांच विकेट लेकर पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया जिसके लिए कमिंस को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

दूसरे टेस्ट में जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है, पहले टेस्ट में कंगारू टीम ने 360 रन से धमाकेदार जीत दर्ज की थी और अब तीसरा और आखिरी टेस्ट 3 जनवरी 2024 से सिडनी में खेला जाएगा।

लाड़ली लक्ष्मी सहित कोई योजना बंद नहीं होगी: मुख्यमंत्री मोहन यादव

विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव आश्वस्त किया कि लाड़ली लक्ष्मी सहित कोई भी योजना बंद नहीं होगी और सरकार सारी योजनाओं के लिए पर्याप्त धनराशि मुहैया करवाएगी.  साथ ही उन्होंने ये भी जानकारी दी कि प्रदेश मैं जिस जिस जगह पर भगवान श्री कृष्ण के चरण कमल पड़े उन सभी स्थानों को तीर्थ स्थान से रूप मैं विकसित किया जायेगा.

 

सम्मान दिवस के रूप में मनाया महाराजा सूरजमल का बलिदान दिवस.

जाट समाज की विभूतियों और मेधावियों का किया सम्मान
मथुरा। महाराजा सूरजमल स्मृति न्यास द्वारा सौंख रोड स्थित होटल बीपी एमराल्ड में हिंदू हृदय सम्राट, भरतपुर के संस्थापक अजेय महाराजा सूरजमल का 260 वां बलिदान दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सत्यप्रिय आर्य, विवेक प्रिय आर्य, अर्चना प्रिय आर्य, मनोज आर्य द्वारा वैदिक हवन करवाया गया। इस अवसर पर जाट समाज की विभूतियों के साथ मेधावियों को सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। समाज की विभूतियों एवं मेधावियों को जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी, पूर्व विधायक प्रणतपाल सिंह तथा डीपीआरओ बुलंदशहर डा प्रीतम सिंह द्वारा सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली विभूतियों में कैप्टन प्रताप सिंह वर्मा जाट शिरोमणि, उद्योगपति सूरजपाल सिंह, कैप्टन पुरन सिंह, सत्यपाल सिंह, अखिलेश चौधरी, पूर्व विधायक प्रताप चौधरी को जाट केसरी, वर्षा चाहर, ऋचा चौधरी, सोनिया सिंह, पल्लवी चाहर, प्राची चाहर को जाट गरिमा तथा कर्नल प्रमोद सोलंकी, डा मेजर अजीत सिकरवार, डा रंजीत चौधरी, डा राहुल चौधरी, पायलट सचिन ठैनुआ, लेफ्टी.राहुल सिंह, लेफ्टी.अमन ठैनुआ, लेफ्टी. अभिषेक कुमार, लेफ्टी. तुषार श्योरान, लेफ्टी. आदित्य चौधरी, राहुल चौधरी, पुनीत चौधरी, यश चिकारा,डा राहुल चौधरी, पंकज सिकरवार, अतुल चौधरी, अनिल देव फौजदार आरएएस, आईआईटियन हर्ष चौधरी, पहलवान सौरभ सिकरवार, नरेंद्र कुमार सिंह, लेफ्टी. गौरव सिकरवार, भारतीय विदेश सेवा के आदित्य चौधरी, गजेंद्र सिंह, विशाल कुंतल, धर्मेश चौधरी को जाट रत्न की उपाधि से अलंकृत किया गया।
जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी ने समाज की एकता पर बल देते हुए महाराजा सूरजमल के व्यक्तित्व से सीख लेने की बात कही। उन्होंने इस प्रकार के आयोजन वर्ष में कम से कम चार बार करने का आग्रह भी न्यास से किया। डीपीआरओ बुलंदशहर प्रीतम सिंह ने शिक्षा के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए युवाओं को आगामी हजार वर्ष का प्लान समझाया। उपस्थित जनसमूह को पूर्व विधायक प्रणतपाल सिंह, पूर्व मंत्री चौ.सरदार सिंह, डा अर्चना प्रिय आर्य, भागवत कथावाचक देवी शैलकिशोरी, पार्षद तिलकवीर चौधरी आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन न्यास के ट्रस्टी व महासचिव चौधरी विजय आर्य ने तथा धन्यवाद न्यास के अध्यक्ष आर बी चौधरी ने दिया। इस अवसर पर क्षत्राणि ग्रुप की अध्यक्ष सुजाता चौधरी, टैरो कार्ड रीडर प्रतिमा सिंह, हेमलता चौधरी आदि ने महिलाओं के हित में कार्यक्रम आयोजन करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में सुजीत चौधरी, किसान नेता राजकुमार तोमर, एड.उमाशंकर सिंह, शिक्षाविद सूरजपाल सिंह, जगवीर चौधरी, हितेंद्र चौधरी, हरपाल सिंह, अमित सिकरवार, पवन चौधरी आदि प्रमुख सहयोगी रहे वहीं चंद्रभान प्रधान, कुश्ती कोच ब्रजमोहन सिंह, सनसवीर सिंह, वीके सिंह, प्रधान सत्यवीर सिंह, सूबे. मेजर वीरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, डा भंवर सिंह चौधरी, योगेंद्र सिंह फौजदार, मानवेंद्र कुमार, सुभाष चौधरी, पार्षद अभिजीत चौधरी, प्रधान मगोर्रा चंद्रपाल कुंतल, भारतीय जाट महासभा जिलाध्यक्ष राजेश चौधरी, कर्मवीर छौंकर, मौनी ताऊ, सत्यपाल सिंह, मुकेश चौधरी, अरविंद चौधरी, पुनीत चौधरी, भानुप्रताप सिंह आदि सैकड़ों की संख्या में उपस्थित रहे.

औषधीय फसलें बदल सकती हैं किसान की वर्तमान दशा – राकेश चौधरी

बनें प्रगतिशील किसान पाएं तरक्की, मुनाफा और सम्मान

जी हां बदलते भारत में देश के किसानों की आय बढ़ाने के लिये किए जा रहे प्रयोगों और आयुर्वेद के बढ़ते चलन से औषधीय फसलों को बड़ा बाजार उपलब्ध हुआ है। आवश्यकता है इन फसलों के बारे में पूर्ण जानकारी, मिट्टी- पानी की जांच और स्वयं के अंदर नए ज्ञान को आत्मसात करने की एक ललक की।

इस बारे में राष्ट्रीय औषधीय पादप मंडल, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य और देशभर में जड़ी बूटियों की खेती के प्रचार प्रसार के लिए 5 लाख किलोमीटर यात्रा कर हर्बल क्रांति की शुरुआत करने वाले राकेश चौधरी ने देशभर के किसानों का आह्वान करते हुए कहा,”आज समय की मांग यही है कि किसान अपनी बेहतरी के लिए औषधीय फसलों को उगाना शुरू करें। परंपरागत खेती अब मुनाफे का सौदा नहीं रही।” जयपुर के महाराजा कॉलेज से साइंस ग्रेजुएट राकेश चौधरी ने बताया कि त्रिस्तरीय फसली चक्र से शुरुआत करना फायदेमंद रहता है। इस तरीके में पहले मेड़बन्दी की फसलें लगाएं, जिसमे नींबू, करौंदा जैसे कांटेदार वृक्ष तत्पश्चात बहुवर्षीय पौधे जैसे नीम, विल्बपत्र, आंवला आदि इसके बाद खाली बची जगह में आवश्यकता अथवा मांग के अनुसार गिलोय, तुलसी, एलोवेरा, शतावर, अश्वगंधा जैसी औषधीय फसलें उगाकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

और भी बहुत सी औषधीय फसलें हैं, जैसे बड़ा गोखरू, छोटा गोखरू, पुनर्नवा, कुसुम (कुछ ठग इसे केसर बताकर भी किसानों की जेब काट लेते हैं), केर सांगरी, काचरी, सनाय, गुग्गल आदि भी उगा सकते हैं। आज स्थिति यह है कि सर्वाधिक मांग वाली गुग्गल भारत मे ही लुप्त होने के कगार पर आ चुका है। इसमें उत्पादन लेने में 7 से 8 वर्ष का समय लगता है, इसलिए भविष्य की बेहतरी के लिए अभी से प्रत्येक खेत मे 10 से 20 गुग्गल के पौधे अवश्य लगा देने चाहिएं। चौधरी ने बताया कि थोड़ी सी ट्रेनिंग से पूरी तकनीक को समझकर और अपने क्षेत्र की मिट्टी-पानी की जांच के उपरांत जलवायु के अनुसार पूर्ण आत्मीयता के साथ यदि औषधीय खेती करें तो देश के किसान अपने साथ साथ समाज और देश का भी भला कर सकते हैं।

दलाल, बिचौलियों और जुबानी वायदों में फंसने पर किसान उठा जाते हैं नुकसान

चौधरी ने विशेष हिदायत देते हुए बताया कि सिर्फ किसी के कह देने भर से या दलाल, बिचौलियों पर भरोसा करके कुछ भी उगा लेने में कोई समझदारी नहीं है। ऐसा करने से निश्चित तौर पर नुकसान ही होता है। एक तो ये लोग पचास पैसे से एक रुपये तक के पौधे को भी 3 से 5 रुपये में उपलब्ध कराके किसानों को ठग लेते हैं और फसल तैयार होने तक ये गायब हो जाते हैं। विश्वसनीय संस्थान या फार्मेसी से लिखित कॉन्ट्रेक्ट साइन करने के बाद ही आगे बढ़ना श्रेयस्कर है। राकेश जी ने बताया कि सरकार द्वारा इस दिशा में काफी प्रयास किये जा रहे हैं, फिर भी प्रत्येक जिले में एक ऐसा किसान सुविधा केंद्र होना आवश्यक है जिसमें औषधीय फसलों के लिए उचित बाजार, मांग, तकनीकी जानकारियों के साथ उचित मंच उपलब्ध करवाया जाय। किसानों में औषधीय खेती को लेकर प्रतिस्पर्धा बनाये रखने के लिये उत्पादकता पर अनुदान जैसे कार्यक्रम शुरू किए जाएं, तो इस दिशा में अभूतपूर्व क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

जाट हेल्पलाइन: सेवा के बदले नाम और भुगतान

स्मार्टफोन चलाने वाले (स्मार्टफोन यूजर्स) जागरूक जाट युवक-युवतियों के लिए जाट समाज की सेवा का भाव और उनको अतिरिक्त आय में प्रदान करने के लिए जाट बुलेटिन लाया है ‘जाट हेल्पलाइन’

जाट समाज के प्रथम एप “जाट बुलेटिन” द्वारा जाट युवक एवं युवतियों के सहयोग से जाट समाज के आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्र/छात्राओं की * शिक्षा * कैरियर/रोजगार * उपचार/चिकित्सा * शादी-विवाह * कानूनी मदद * और सरकारी मदद दिलाने के उद्देश्य को पूर्ण करने का बीड़ा उठाया है।

जाट बुलेटिन के साथ स्वेच्छाभाव से जुड़ने वाले स्मार्टफ़ोनधारी अपनी सुविधानुसार ग्राम, ब्लॉक, तहसील या जिलास्तर पर कार्य कर सकते हैं। इस बारे में जाट बुलेटिन के संपादक विजय चौधरी ने बताया कि हमारे साथ जुड़ने वाले सभी युवक/युवती अपने सामान्य कार्य, नौकरी या अध्ययन करते हुए भी जाट समाज की भलाई, जाट समाज के कार्यक्रमों की कवरेज, अपने आसपास के शिक्षा, खेल, सरकारी नौकरी अथवा अन्य क्षेत्रों में मेधावी जाट पाल्यों की सूची आदि के माध्यम से समाज सेवा कर सकते हैं। इस समाज सेवा के बदले में इन सभी स्वेच्छाभावियों को जाट बुलेटिन अपनी विज्ञापन से होने वाली आय में से उनकी सेवाओं के अनुसार भुगतान भी करेगा।

श्री चौधरी ने समाज के सभी जागरूक जाट भाई बहनों से अनुरोध भी किया कि आप अपने स्मार्टफोन और इंटरनेट डेटा का 1प्रतिशत भी अपनी कौम की सेवा में खर्च करेंगे तो आपको तीन फायदे होंगे।

पहला आपके द्वारा भेजी गई खबर, वीडियो या जानकारी आपके नाम/ फोटो के साथ प्रकाशित और प्रसारित की जाएगी। जिससे आपको अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। दूसरा आपके स्थानीय जाट समाज मे आपको अतिरिक्त सम्मान मिलना शुरू होगा और तीसरा आप बिना अतिरिक्त मेहनत किये समाज सेवा भी कर लेंगे। इसलिए में आपका आव्हान करता हूँ कि समाज हित मे शुरू किए गए इस यज्ञ में हमारे साथ जुड़कर कुछ आहुतियां दें। जुड़ने के लिए निम्न व्हाट्सएप्प नंबर पर अपनी डिटेल भेजें-
9410083046 अथवा हमारी वेबसाइट पर लॉगिन करें।

जाट बुलेटिन की ‘जाट हेल्पलाइन’ से जाट युवक-युवतियों को होंगे तीन फायदे

स्मार्टफोन चलाने वाले (स्मार्टफोन यूजर्स) जागरूक जाट युवक-युवतियों के लिए जाट समाज की सेवा का भाव और उनको अतिरिक्त आय में प्रदान करने के लिए जाट बुलेटिन लाया है ‘जाट हेल्पलाइन’ ।

जाट समाज के प्रथम एप “जाट बुलेटिन” द्वारा जाट युवक एवं युवतियों के सहयोग से जाट समाज के आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्र/छात्राओं की * शिक्षा * कैरियर/रोजगार * उपचार/चिकित्सा * शादी-विवाह * कानूनी मदद * और सरकारी मदद दिलाने के उद्देश्य को पूर्ण करने का बीड़ा उठाया है।

जाट बुलेटिन के साथ स्वेच्छाभाव से जुड़ने वाले स्मार्टफ़ोनधारी अपनी सुविधानुसार ग्राम, ब्लॉक, तहसील या जिलास्तर पर कार्य कर सकते हैं। इस बारे में जाट बुलेटिन के संपादक विजय चौधरी ने बताया कि हमारे साथ जुड़ने वाले सभी युवक/युवती अपने सामान्य कार्य, नौकरी या अध्ययन करते हुए भी जाट समाज की भलाई, जाट समाज के कार्यक्रमों की कवरेज, अपने आसपास के शिक्षा, खेल, सरकारी नौकरी अथवा अन्य क्षेत्रों में मेधावी जाट पाल्यों की सूची आदि के माध्यम से समाज सेवा कर सकते हैं। इस समाज सेवा के बदले में इन सभी स्वेच्छाभावियों को जाट बुलेटिन अपनी विज्ञापन से होने वाली आय में से उनकी सेवाओं के अनुसार भुगतान भी करेगा।

श्री चौधरी ने समाज के सभी जागरूक जाट भाई बहनों से अनुरोध भी किया कि आप अपने स्मार्टफोन और इंटरनेट डेटा का 1प्रतिशत भी अपनी कौम की सेवा में खर्च करेंगे तो आपको तीन फायदे होंगे।

पहला आपके द्वारा भेजी गई खबर, वीडियो या जानकारी आपके नाम/ फोटो के साथ प्रकाशित और प्रसारित की जाएगी। जिससे आपको अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। दूसरा आपके स्थानीय जाट समाज मे आपको अतिरिक्त सम्मान मिलना शुरू होगा और तीसरा आप बिना अतिरिक्त मेहनत किये समाज सेवा भी कर लेंगे। इसलिए में आपका आव्हान करता हूँ कि समाज हित मे शुरू किए गए इस यज्ञ में हमारे साथ जुड़कर कुछ आहुतियां दें। जुड़ने के लिए निम्न व्हाट्सएप्प नंबर पर अपनी डिटेल भेजें-
9410083046 अथवा हमारी वेबसाइट पर लॉगिन करें।

Weight Loss: जानिए कैसे आप अपनी वेट लॉस डाइट में भी शामिल कर सकते हैं सफेद चावल

Weight Loss: Know how you can include white rice in your weight loss diet.

How To Eat Rice On A Weight Loss Diet: उन लोगों ने सफेद चावल को तकरीब त्याग ही दिया है, जो अपने वजन को लेकर सजग हैं. सफेद चावलों में काफी मात्रा में मिलने वाला स्टार्च इसे कैलोरी से भरपूर बनाता है. कोई कितना ही कहे कि आपको सफेद चावल नहीं खाने चाहिए या कम खाने चाहिए, लेकिन जब भी चावलों का नाम आता है तो सबसे पहले सफेद चावल ही जहन में आते हैं. सफेद चावल दुनिया भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं. लेकिन फिर भी जब कभी हेल्दी डाइट की बता होती है तो इन्हें खाने में शामिल नहीं किया जाता, आखिर क्यों? वास्तव में यह अगर डेली डाइट में शामिल किए जाएं तो यह काफी फायदेमंद साबित होते हैं. इनमें फाइबर के साथ-साथ पोषक तत्व भी होते हैं, जो सेहत के लिए लाभदायक होते हैं. इतना ही नहीं यह वजन कम करने से जुड़ी डाइट (weight loss diet) में भी बहुत जरूरी है. अगर आप वजन कम करने के लिए एक्सरसाइज कर रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि सिर्फ एक्सरसाइज ही कमाल नहीं कर सकती. आपको अपनी डाइट का भी ध्यान रखना होगा. अब तो आप समझ ही चुके होंगे कि इस लेख में हम बात करने वाले हैं वजन कम करने के दौरान डाइट में सफेद चावलो के बारे में.

कैसे वजन कम करने या मोटापा घटाने के लिए अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं सफेद चावल (How To Eat Rice On A Weight Loss Diet) 

ज्यादातर वेट लोस डाइट सफेद चावल खाने से मना करती हैं. क्योंकि इनमें मौजूद कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है. वजन कम करने या मोटापा घटाने के लिए आपको कैलोरी डेफिशिएट (calorie deficit) करना होगा. इसके लिए आपको कैलोरी बर्न ज्यादा करने के साथ-साथ ही साथ कैलोरी इनटेक को भी संयमित करना होता है. 
लेकिन ऐसे में सफेद चावलों को खाया जाए या नहीं इसी बारे में हम आपको बताते हैं. पोषक तत्वों के बिना अगर इन्हें डाइट में शामिल किया जाए, तो इससे बेरीबेरी नामक रोग होने की संभावना बनी रहती है. यही नहीं कई बार सफेद चावल व्यक्ति के शरीर को भी कई तरीके से नुकसान पहुंचाते हैं, साथ ही मैटाबॉलिक परेशानी- डायबीटिज़, मोटापा और कई बीमारियों को बढ़ावा देते हैं. सफेद चावलों में सबसे ज्यादा स्टार्च होती है. और पॉलिश की प्रक्रिया के दौरान इसमें से कुछ पोषक तत्व जैसे थियामिन जो कि बी-1 के नाम से भी जाना जाता है और विटामिन-बी कम हो जाते हैं. यह थियामिन की कमी के कारण होता है.

Type-2 Diabetes: ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करेगी रागी, डायबिटीज में है फायदेमंद

Type-2 Diabetes: Ragi will help in controlling blood sugar level, it is beneficial in diabetes.

रागी: डायबिटीज में है फायदेमंद

डायबिटीज इस समय बेहद तेजी से फैल रही है. और दुनिया भर में होने वाली मौतों की बड़ी वजहों में से एक है. हेल्थ एक्सपर्ट और डाइटिशियन की भी यही सलाह रहती है कि डायबिटीज के मरीजों को अपने खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए. डायबिटीज के खतरे को इन आकंडों से भी समझ सकते हैं कि भारत में लगभग 7.2 करोड़ डायबिटीज या मधुमेह (Diabetes) रोगी हैं. आशंका है कि यह संख्या साल 2025 तक 13.4 करोड़ तक पहुंच जाएगी. डायबिटीज या मधुमेह होने वाले लोगों को ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar leve) पर ध्यान देने की जरूरत होती है. इसके साथ ही साथ उन्हेंरक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) के आवश्यक लेवल को बनाए रखना होता है. एक बात जो हम सबको समझ लेनी चाहिए वह यह कि हम जो भी खाते हैं, जैसा भी खाते हैं वह हमारी सेहत पर सीधा असर करती है. तो अगर आपको डायबिटीज की समस्या है और आप यह जानना चाहते हैं कि आपके लिए क्या खाना सही है और क्या गलत, तो आप सही लेख पढ़ रहे हैं. इस लेख में हम आपको बताएंगे एक ऐसे सुपरफूड के बारे में जो आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने में मददगार होगा और डायबिटीज को कंट्रोल (Control diabetes) करेगा.

यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (United States Department of Agriculture (USDA) के अनुसार डायबिटीक को अपने आहार का तकरीबन 50 फीसदी हिस्सा होलग्रेन यानी अनाज के रूप में लेना चाहिए. क्योंकि होलग्रेन या अनाज फाइबर से भरपूर होते हैं, तो वे ब्लड में अचानक से होने वाले ग्लूकोज एब्जोब्शन को धीमा करते हैं. इन्हें लेने से अचानक ब्लड शुगर लेवल स्पाइकिंग को रोका जा सकता है. कहने का मतलब है कि इनसे ब्लड शुगर लेवल अचानक से नहीं बढ़ता. इसके साथ ही साथ यह लो ग्लाइसेमिक आहार होते हैं जोकि ब्लड शुगर लेवल में उछाल नहीं आने देते और टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 diabetes) के खतरे को कम करते हैं. तो अब आप सोच रहे होंगे कि कौन-कौन से होलग्रेन यानी अनाज आपके लिए अच्छे हैं, तो चलिए शुरुआत करते है सबसे बेहतर वाले से. यह है रागी, जिसे इंग्लिश में फिंगर माइलेट्स (Finger millets) कहा जाता है.

रागी के फायदे (Ragi Benefits)

रागी अपने आप में एक पोषण से भरपूर आहार है. रागी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन, फाइबर, और कार्बोहाइड्रेट होते है. रागी में कैल्शियम होता है, तो यह आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत करने में भी मददगार है. साथ ही साथ फाइबर से भरपूर रागी आपके पाचन को भी दुरुस्त रखती है. खून की कमी को दूर करने के लिए भी रागी का खूब इस्तेमाल किया जाता है. यह कम हिमोग्लोबिन वाले लोगों के आहार में शामिल करने से इस समस्या को दूर करती है. 

रागी के फायदे डायबिटीज में (Ragi For Diabetes)

रागी अपने आप में एक पूर्ण पोषक आहार है. भारतीय पारंपरिक आहार में रागी का विशेष महत्व है. उत्तर भारत में जहां सबसे ज्यादा चावलों का इस्तेमाल होता है, वहां रागी की भी अपनी अलग जगह है. लेकिन दक्षिण भारतीय आहार (खासकर कर्नाटका) में इसे बहुत ही अधिक इस्तेमाल किया जाता है. यहां आपको रागी आज भी आहार में मुख्य सामग्री के तौर पर दिख जाएगी. रागी की सबसे अच्छी बात यह है कि यह कार्बोहाड्रेट्स का अच्छा सोर्स है, और क्योंकि यह पॉलिश करने या प्रोसेस्ड करने के लिहाज से बहुत छोटी है तो यह ज्यादातर शुद्ध रूप में मिलती है. रागी में पॉलिफेनॉल्स, कैल्शियम और एसेंशियल एमीनो एसिड होते हैं. डायबिटीज रोगियों को रागी खाने की सलाह दी जाती है. यह उनके लिए सफेद चावलों का अच्छा विकल्प हो सकता है. यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में भी मददगार हो सकता है. 

नोट: अपने आहार में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें.

डायबिटीज को कंट्रोल करने में ये तीन टिप्‍स कर सकते हैं आपकी मदद

Diabetes Control: These three tips can help you in controlling diabetes

डायबिटीज से आज दुनिया भर में लाखों लोग पीड़ित हैं. यह मेटाबॉलिक डिसऑर्डर में से एक है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी बॉडी में ब्‍लड शूगर का लेवल असामान्य रूप से अधिक होता है. डायबिटीज तब होती है जब आपका इंसुलिन उत्पादन ठीक नहीं होता. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उचित उपायों का उपयोग करके डायबिटीज को कंट्रोल न किया जाए, तो यह आपके किडनी, हार्ट के साथ-साथ वजन बढ़ने की समस्‍या से आपको पीड़ित कर सकता है. केरल आयुर्वेद के डॉ. ओम के अनुसार टाइप -1 डायबिटीज वात (वायु और गैस ) दोष का असंतुलन है, जबकि टाइप -2 डायबिटीज कपा (जल और पृथ्वी) दोष की अधिकता है. आयुर्वेद आहार संबंधी कुछ फेमस प्रथाओं का भी सुझाव देता है जो मधुमेह को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए काम आ सकते हैं. मधुमेह रोगियों को वसायुक्त, तली-भुनी और ऑयली खाने से बचना चाहिए और ताज़े त‍था मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, खासकर वह खाद्य पदार्थ जिनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है. 

इन आयुवेर्दिक टिप्‍स को अपनाकर आप डायबिटीज को कंट्रोल कर सकते हैं: 

1. तांबे के बर्तन में पानी पीएं

डॉ. वसंत की किताब ‘द कम्प्लीट बुक ऑफ आयुर्वेदिक होम रेमेडीज’ में कहा गया है कि रात भर तांबे के बर्तन या तांबे के गिलास में थोड़ा पानी रखें और अगले दिन इसे पी लें. ऐसा करने से ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव को रोकने में मदद मिल सकती है. तांबे के बर्तन में पानी रखने से तांबे के लाभकारी गुण पानी में शामिल हो जाते हैं. कॉपर कई हानिकारक माइक्रोबियल गतिविधि से लड़ने में मदद करता है. एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एंफ्लामेंटरी गुण भी मधुमेह के प्रबंधन में सहायक होते हैं.

2. मेथी के बीज

कई अध्ययनों में डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए मेथी या मेथी के बीज की प्रभावी बताया गया है. इंटरनेशनल जर्नल फॉर विटामिन एंड न्यूट्रिशन रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, गर्म पानी में भिगोए गए 10 ग्राम मेथी के बीज को रोजाना लेना टाइप -2 मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है. मेथी के बीज ब्‍लड शूगर को कंट्रोल करने में मदद करता है. फाइबर से भरपूर होने के कारण, यह ब्‍लड सर्कुलेशन की धीमी गति को सुनिश्चित करता है.

3. हल्‍के कड़वे खाद्य पदार्थों का करें सेवन

अपनी डाइट में से मिठाई और डेर्जट हटाना ही पर्याप्त नहीं है, आपको हेल्‍दी डाइट भी अपनानी चाहिए. कड़वे खाद्य पदार्थ जैसे करेला, आंवला और एलोवेरा डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए चमत्कार जैसे हैं. करेले में एक इंसुलिन जैसा यौगिक होता है जिसे पॉलीपेप्टाइड-पी या पी-इंसुलिन कहा जाता है, यह डायबिटीज  विरोधी प्रभाव के लिए जाना जाता है. आंवला फाइबर से समृद्ध होता है, जो इसे मधुमेह प्रबंधन के लिए एक आदर्श खाद्य पदार्थ बनाता है.

इन सुझावों का पालन करें और स्वाभाविक रूप से अपने ब्‍लउ शूगर के लेवल को कंट्रोल करें. याद रहे अपनी डाइट में कोई बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा उचित रहता है.