Weight Loss: जानिए कैसे आप अपनी वेट लॉस डाइट में भी शामिल कर सकते हैं सफेद चावल

Weight Loss: Know how you can include white rice in your weight loss diet.

How To Eat Rice On A Weight Loss Diet: उन लोगों ने सफेद चावल को तकरीब त्याग ही दिया है, जो अपने वजन को लेकर सजग हैं. सफेद चावलों में काफी मात्रा में मिलने वाला स्टार्च इसे कैलोरी से भरपूर बनाता है. कोई कितना ही कहे कि आपको सफेद चावल नहीं खाने चाहिए या कम खाने चाहिए, लेकिन जब भी चावलों का नाम आता है तो सबसे पहले सफेद चावल ही जहन में आते हैं. सफेद चावल दुनिया भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं. लेकिन फिर भी जब कभी हेल्दी डाइट की बता होती है तो इन्हें खाने में शामिल नहीं किया जाता, आखिर क्यों? वास्तव में यह अगर डेली डाइट में शामिल किए जाएं तो यह काफी फायदेमंद साबित होते हैं. इनमें फाइबर के साथ-साथ पोषक तत्व भी होते हैं, जो सेहत के लिए लाभदायक होते हैं. इतना ही नहीं यह वजन कम करने से जुड़ी डाइट (weight loss diet) में भी बहुत जरूरी है. अगर आप वजन कम करने के लिए एक्सरसाइज कर रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि सिर्फ एक्सरसाइज ही कमाल नहीं कर सकती. आपको अपनी डाइट का भी ध्यान रखना होगा. अब तो आप समझ ही चुके होंगे कि इस लेख में हम बात करने वाले हैं वजन कम करने के दौरान डाइट में सफेद चावलो के बारे में.

कैसे वजन कम करने या मोटापा घटाने के लिए अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं सफेद चावल (How To Eat Rice On A Weight Loss Diet) 

ज्यादातर वेट लोस डाइट सफेद चावल खाने से मना करती हैं. क्योंकि इनमें मौजूद कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है. वजन कम करने या मोटापा घटाने के लिए आपको कैलोरी डेफिशिएट (calorie deficit) करना होगा. इसके लिए आपको कैलोरी बर्न ज्यादा करने के साथ-साथ ही साथ कैलोरी इनटेक को भी संयमित करना होता है. 
लेकिन ऐसे में सफेद चावलों को खाया जाए या नहीं इसी बारे में हम आपको बताते हैं. पोषक तत्वों के बिना अगर इन्हें डाइट में शामिल किया जाए, तो इससे बेरीबेरी नामक रोग होने की संभावना बनी रहती है. यही नहीं कई बार सफेद चावल व्यक्ति के शरीर को भी कई तरीके से नुकसान पहुंचाते हैं, साथ ही मैटाबॉलिक परेशानी- डायबीटिज़, मोटापा और कई बीमारियों को बढ़ावा देते हैं. सफेद चावलों में सबसे ज्यादा स्टार्च होती है. और पॉलिश की प्रक्रिया के दौरान इसमें से कुछ पोषक तत्व जैसे थियामिन जो कि बी-1 के नाम से भी जाना जाता है और विटामिन-बी कम हो जाते हैं. यह थियामिन की कमी के कारण होता है.

Type-2 Diabetes: ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करेगी रागी, डायबिटीज में है फायदेमंद

Type-2 Diabetes: Ragi will help in controlling blood sugar level, it is beneficial in diabetes.

रागी: डायबिटीज में है फायदेमंद

डायबिटीज इस समय बेहद तेजी से फैल रही है. और दुनिया भर में होने वाली मौतों की बड़ी वजहों में से एक है. हेल्थ एक्सपर्ट और डाइटिशियन की भी यही सलाह रहती है कि डायबिटीज के मरीजों को अपने खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए. डायबिटीज के खतरे को इन आकंडों से भी समझ सकते हैं कि भारत में लगभग 7.2 करोड़ डायबिटीज या मधुमेह (Diabetes) रोगी हैं. आशंका है कि यह संख्या साल 2025 तक 13.4 करोड़ तक पहुंच जाएगी. डायबिटीज या मधुमेह होने वाले लोगों को ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar leve) पर ध्यान देने की जरूरत होती है. इसके साथ ही साथ उन्हेंरक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) के आवश्यक लेवल को बनाए रखना होता है. एक बात जो हम सबको समझ लेनी चाहिए वह यह कि हम जो भी खाते हैं, जैसा भी खाते हैं वह हमारी सेहत पर सीधा असर करती है. तो अगर आपको डायबिटीज की समस्या है और आप यह जानना चाहते हैं कि आपके लिए क्या खाना सही है और क्या गलत, तो आप सही लेख पढ़ रहे हैं. इस लेख में हम आपको बताएंगे एक ऐसे सुपरफूड के बारे में जो आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने में मददगार होगा और डायबिटीज को कंट्रोल (Control diabetes) करेगा.

यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (United States Department of Agriculture (USDA) के अनुसार डायबिटीक को अपने आहार का तकरीबन 50 फीसदी हिस्सा होलग्रेन यानी अनाज के रूप में लेना चाहिए. क्योंकि होलग्रेन या अनाज फाइबर से भरपूर होते हैं, तो वे ब्लड में अचानक से होने वाले ग्लूकोज एब्जोब्शन को धीमा करते हैं. इन्हें लेने से अचानक ब्लड शुगर लेवल स्पाइकिंग को रोका जा सकता है. कहने का मतलब है कि इनसे ब्लड शुगर लेवल अचानक से नहीं बढ़ता. इसके साथ ही साथ यह लो ग्लाइसेमिक आहार होते हैं जोकि ब्लड शुगर लेवल में उछाल नहीं आने देते और टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 diabetes) के खतरे को कम करते हैं. तो अब आप सोच रहे होंगे कि कौन-कौन से होलग्रेन यानी अनाज आपके लिए अच्छे हैं, तो चलिए शुरुआत करते है सबसे बेहतर वाले से. यह है रागी, जिसे इंग्लिश में फिंगर माइलेट्स (Finger millets) कहा जाता है.

रागी के फायदे (Ragi Benefits)

रागी अपने आप में एक पोषण से भरपूर आहार है. रागी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन, फाइबर, और कार्बोहाइड्रेट होते है. रागी में कैल्शियम होता है, तो यह आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत करने में भी मददगार है. साथ ही साथ फाइबर से भरपूर रागी आपके पाचन को भी दुरुस्त रखती है. खून की कमी को दूर करने के लिए भी रागी का खूब इस्तेमाल किया जाता है. यह कम हिमोग्लोबिन वाले लोगों के आहार में शामिल करने से इस समस्या को दूर करती है. 

रागी के फायदे डायबिटीज में (Ragi For Diabetes)

रागी अपने आप में एक पूर्ण पोषक आहार है. भारतीय पारंपरिक आहार में रागी का विशेष महत्व है. उत्तर भारत में जहां सबसे ज्यादा चावलों का इस्तेमाल होता है, वहां रागी की भी अपनी अलग जगह है. लेकिन दक्षिण भारतीय आहार (खासकर कर्नाटका) में इसे बहुत ही अधिक इस्तेमाल किया जाता है. यहां आपको रागी आज भी आहार में मुख्य सामग्री के तौर पर दिख जाएगी. रागी की सबसे अच्छी बात यह है कि यह कार्बोहाड्रेट्स का अच्छा सोर्स है, और क्योंकि यह पॉलिश करने या प्रोसेस्ड करने के लिहाज से बहुत छोटी है तो यह ज्यादातर शुद्ध रूप में मिलती है. रागी में पॉलिफेनॉल्स, कैल्शियम और एसेंशियल एमीनो एसिड होते हैं. डायबिटीज रोगियों को रागी खाने की सलाह दी जाती है. यह उनके लिए सफेद चावलों का अच्छा विकल्प हो सकता है. यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में भी मददगार हो सकता है. 

नोट: अपने आहार में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें.

डायबिटीज को कंट्रोल करने में ये तीन टिप्‍स कर सकते हैं आपकी मदद

Diabetes Control: These three tips can help you in controlling diabetes

डायबिटीज से आज दुनिया भर में लाखों लोग पीड़ित हैं. यह मेटाबॉलिक डिसऑर्डर में से एक है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी बॉडी में ब्‍लड शूगर का लेवल असामान्य रूप से अधिक होता है. डायबिटीज तब होती है जब आपका इंसुलिन उत्पादन ठीक नहीं होता. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उचित उपायों का उपयोग करके डायबिटीज को कंट्रोल न किया जाए, तो यह आपके किडनी, हार्ट के साथ-साथ वजन बढ़ने की समस्‍या से आपको पीड़ित कर सकता है. केरल आयुर्वेद के डॉ. ओम के अनुसार टाइप -1 डायबिटीज वात (वायु और गैस ) दोष का असंतुलन है, जबकि टाइप -2 डायबिटीज कपा (जल और पृथ्वी) दोष की अधिकता है. आयुर्वेद आहार संबंधी कुछ फेमस प्रथाओं का भी सुझाव देता है जो मधुमेह को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए काम आ सकते हैं. मधुमेह रोगियों को वसायुक्त, तली-भुनी और ऑयली खाने से बचना चाहिए और ताज़े त‍था मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, खासकर वह खाद्य पदार्थ जिनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है. 

इन आयुवेर्दिक टिप्‍स को अपनाकर आप डायबिटीज को कंट्रोल कर सकते हैं: 

1. तांबे के बर्तन में पानी पीएं

डॉ. वसंत की किताब ‘द कम्प्लीट बुक ऑफ आयुर्वेदिक होम रेमेडीज’ में कहा गया है कि रात भर तांबे के बर्तन या तांबे के गिलास में थोड़ा पानी रखें और अगले दिन इसे पी लें. ऐसा करने से ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव को रोकने में मदद मिल सकती है. तांबे के बर्तन में पानी रखने से तांबे के लाभकारी गुण पानी में शामिल हो जाते हैं. कॉपर कई हानिकारक माइक्रोबियल गतिविधि से लड़ने में मदद करता है. एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एंफ्लामेंटरी गुण भी मधुमेह के प्रबंधन में सहायक होते हैं.

2. मेथी के बीज

कई अध्ययनों में डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए मेथी या मेथी के बीज की प्रभावी बताया गया है. इंटरनेशनल जर्नल फॉर विटामिन एंड न्यूट्रिशन रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, गर्म पानी में भिगोए गए 10 ग्राम मेथी के बीज को रोजाना लेना टाइप -2 मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है. मेथी के बीज ब्‍लड शूगर को कंट्रोल करने में मदद करता है. फाइबर से भरपूर होने के कारण, यह ब्‍लड सर्कुलेशन की धीमी गति को सुनिश्चित करता है.

3. हल्‍के कड़वे खाद्य पदार्थों का करें सेवन

अपनी डाइट में से मिठाई और डेर्जट हटाना ही पर्याप्त नहीं है, आपको हेल्‍दी डाइट भी अपनानी चाहिए. कड़वे खाद्य पदार्थ जैसे करेला, आंवला और एलोवेरा डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए चमत्कार जैसे हैं. करेले में एक इंसुलिन जैसा यौगिक होता है जिसे पॉलीपेप्टाइड-पी या पी-इंसुलिन कहा जाता है, यह डायबिटीज  विरोधी प्रभाव के लिए जाना जाता है. आंवला फाइबर से समृद्ध होता है, जो इसे मधुमेह प्रबंधन के लिए एक आदर्श खाद्य पदार्थ बनाता है.

इन सुझावों का पालन करें और स्वाभाविक रूप से अपने ब्‍लउ शूगर के लेवल को कंट्रोल करें. याद रहे अपनी डाइट में कोई बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा उचित रहता है.