जाट समाज की विभूति एवं मेधावी सम्मान के साथ विशाल स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया..
मथुरा। महाराजा सूरजमल स्मृति न्यास द्वारा डैंपियर नगर स्थित किसान भवन में हिंदू हृदय सम्राट, भरतपुर के संस्थापक अजेय महाराजा सूरजमल का 261 वां बलिदान दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य सत्यप्रिय आर्य द्वारा वैदिक हवन करवाकर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मा.मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी तथा विशिष्ट अतिथि सांसद तेजवीर सिंह चौधरी रहे। कार्यक्रम में मा. मंत्री द्वारा महाराजा सूरजमल के आदर्शों पर चलने, संगठित रहने तथा महापुरुषों के जीवन चरित्र से बच्चों को संस्कारित करने पर जोर दिया। तथा जाट केसरी की उपाधि से हास्य कवि सबरस मुरसानी, अरविंद चौधरी, एथलीट मोहन सिंह आर्य तथा एड.राजप्रकाश चिकारा को सम्मानित किया। वहीं सांसद तेजवीर सिंह ने वर्तमान समय में जाट समाज की उन्नति पर संतोष व्यक्त करते हुए एकजुटता की कमी पर कठोर शब्दों में डांट भी पिलाई। श्री सिंह द्वारा राष्ट्रीय एयर राइफल शूटर मीनेश जुरैल, कथा वाचक रिया फौजदार, शिक्षिका प्रदीपिका फौजदार तथा ज्योति चौधरी को जाट गरिमा तथा रामप्रकाश कुंतल, रामवीर, शांतनु छौंकर, शैलेन्द्र सिंह नरवार, डॉ दीपू चौधरी, फ्लाइंग अफसर रजत सिंह, बॉक्सर विष्णु चौधरी, सचिव चिंटू कुमार कुंतल, हॉकी प्लेयर यश चौधरी, तनुज चौधरी, मोहित चौधरी, जनार्दन पहलवान, डॉ दुष्यंत चौधरी तथा शुभम चौधरी को जाट रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया।
उपस्थित जनसमूह को किसान नेता व न्यास के कोषाध्यक्ष राजकुमार सिंह तोमर, महेंद्र चौधरी, योगेन्द्र फौजदार, चौ गुलवीर सिंह, हरिपाल सिंह, कृष्ण जन्मभूमि न्यास के एड. महेंद्र सिंह आदि ने संबोधित किया और महाराजा सूरजमल के विचार और संस्कार अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन न्यास के ट्रस्टी व महासचिव चौधरी विजय आर्य ने तथा धन्यवाद न्यास के अध्यक्ष आर बी चौधरी ने दिया।
इस अवसर पर डॉ परमिंदर सिंह के संयोजन में आयोजित स्वास्थ्य कैंप में चिकित्सकों द्वारा लगभग दो सैकड़ा से अधिक लोगों को निशुल्क परीक्षण एवं परामर्श प्रदान किया गया। वहीं सत्तर वर्ष से अधिक आयु वाले आधा सैकड़ा वृद्धों के आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए।
कार्यक्रम में जगवीर चौधरी, हितेंद्र सिंह चौधरी, सूरजपाल सिंह, हरेश कुमार सिंह, अमित सिकरवार, पुष्पेंद्र सिंह भरऊ, पवन चौधरी, इंजी. सुरेन्द्र सिंह, सचिव हरेंद्र चौधरी, ज्वाला सिंह, रामकुमार सिंह, राजेश सोलंकी, दीवान सिह, विनीता वर्मा, डॉ जयकुमार, उमाशंकर सिंह, रेनू सिंह, भाजपा नेत्री डॉ मेघना चौधरी, सुजाता चौधरी, हेमलता चौधरी आदि का सहयोग रहा। उपस्थित जनों में किसान नेता बुद्धासिंह, प्रधान सूरज सिंह, मानवेंद्र कुमार, नागेंद्र कुमार, सुभाष चौधरी, कर्मवीर छौंकर, मौनी ताऊ, अरविंद चौधरी, पुनीत चौधरी, भानुप्रताप सिंह, शिवकुमार चौधरी, एड.विजयेंद्र वैदिक, बार के पूर्व अध्यक्ष आलोक सिंह, एड. हाकिम सिंह, महावीर सिंह, रनवीर सिंह, जयवीर सिंह, रघुनाथ सिंह, एड. विक्रम सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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13 फरवरी 1707, को राजस्थान के भरतपुर मैं जाट कुल मैं जन्मे हिन्दू महाराजा सूरजमल (Maharaja Surajmal) या सुजान सिंह अपने समय के वीर योद्धा और रणनीतिकार थे। उनका शासन जिन क्षेत्रों में था वे वर्तमान समय में भारत की राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़, फ़िरोज़ाबाद, एटा, राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर, हरियाणा का गुरुग्राम, रोहतक, झज्जर, फरीदाबाद, रेवाड़ी, मेवात हैं। राजा सूरजमल में वीरता, धीरता, गम्भीरता, उदारता, सतर्कता, दूरदर्शिता, सूझबूझ, चातुर्य और राजमर्मज्ञता का सुखद संगम सुशोभित था। मेल-मिलाप और सह-अस्तित्व तथा समावेशी सोच को आत्मसात करने वाली भारतीयता के वे सच्चे प्रतीक थे। राजा सूरज मल के समकालीन एक इतिहासकार ने उन्हें ‘जाटों का प्लेटो’ कहा है। इसी तरह एक आधुनिक इतिहासकार ने उनकी दूरदृष्टि और बुद्धिमत्ता को देखने हुए उनकी तुलना ओडिसस से की है।
महाराजा सूरजमल (Maharaja Surajmal) के जीवन परिचय और उनके शासनकाल मैं किये गए उत्कृष्ट कार्यों और उनके द्वारा लाडे गए भीषण युद्धों पर प्रकाश डालने का प्रयत्न करते हुए, जाट बुलेटिन प्रस्तुत करते हैं महाराजा सूरजमल के जीवन परिचय और उनकी वीरगाथा का प्रथम भाग।
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महाराजा सूरजमल जाट(Maharaja Surajmal) भारतीय इतिहास के उन योद्धाओं और शासकों में से एक हैं जिन्होंने अपनी सैन्य कुशलता, रणनीतिक बुद्धिमत्ता और प्रजा के प्रति न्यायप्रियता के साथ एक अमिट छाप छोड़ी। वे न केवल भरतपुर राज्य के संस्थापक थे, बल्कि उन्होंने जाट समुदाय को संगठित कर उन्हें भारतीय इतिहास में सम्मानजनक स्थान दिलाया। उनका जीवन और शासनकाल साहस, त्याग और रणनीतिक कौशल का प्रतीक है।
खेल डेस्क, देश की आन बान शान की खातिर हमेशा से ही तत्पर रहने वाला समाज जहाँ मेहनत से खेती करके देश के लिए अनाज उत्पन्न करता है वहीं सीमा पर दुश्मनो को करारा जवाब देने के लिए अपने प्राण भी न्योछावर करने से पीछे नहीं हटता।
इस बार भी Paris Olympics 2024 मैं भी जाटों ने अपना पूरा दबदबा कायम कर रखा है, देश के लिए पदक जीतने मैं इस बार भी जाटों ने पूरा दबदबा बना रखा है। मनु भाकर, सबरजोत सिंह के बाद अमन सेहरावत ने कांस्य पदक जीतकर देश को गौरवान्वित करने का एक और मौका दे दिया।
अमन सेहरावत ने कुश्ती मैं अपना मुकाबला 13-5 से जीतकर जीतकर देश को छठा कांस्य पदक दिलाया। विनेश फोगट की ही तरह अमन पर भी डिसक्वालीफाई होने खतरा मंडरा रहा था मगर उन्होंने पूरी रात मेहनत कर अपना वजन संतुलित किया और पदक लाने मैं सफल रहे। उन्होंने इस मेडल के लिए काफी कड़ी मेहनत की, एक रिपोर्ट के मुताबिक अमन ने करीब 10 घंटे में 4.6 किलोग्राम वजन घटा लिया।
इसी के साथ एक सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज से साथ भारत के Paris Olympics 2024 मैं कुल 6 पदक हो गए हैं जो मुख्य रूप से मनु भाकर, सरबजोत सिंह, स्वप्निल कुसाले ने शूटिंग मैं, हॉकी टीम ने, नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक मैं और अमन सेहरावत ने कुश्ती मैं जीते हैं।
बताते चलें की अगर विनेश फोगट डिसक्वालीफाई नहीं होती तो गोल्ड या सिल्वर के साथ भारत को 7 पदक मिलने के साथ ही रैंकिंग मैं भी अच्छी उछाल मिलती।
भारत की स्टार शूटर और जाट समाज की बेटी मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में इतिहास रच दिया है। वह ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली देश की पहली महिला निशानेबाज बन गईं। उन्होंने महिलाओं के व्यक्तिगत 10 मीटर एयर पिस्टल फाइनल में कांस्य पदक जीता था। अब मनु ने आज मंगलवार को सरबजोत सिंह के साथ मिश्रित टीम 10 मीटर एयर पिस्टल फाइनल में भारत को एक और कांस्य पदक दिलाकर इतिहास रच दिया है। मनु एक और कांस्य पदक जीतने के साथ ही एक ही ओलंपिक खेलों में दो पदक जीतने वाली स्वतंत्र भारत की पहली एथलीट बन गई हैं।
मनु और सरबजीत के कांस्य पदक जीतते ही पूरा देश जश्न में डूब गया। ओलंपिक में अभी तक भारत को दो पदक मिले हैं, दोनों ही हरियाणा और पंजाब के खिलाड़ियों ने जीते हैं।
अंबाला के मुलाना के गांव धीन के निवासी शूटर सरबजोत ने पेरिस ओलंपिक में पहली बार में कांस्य पदक झटक कर कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पदक 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स मुकाबले में सरबजोत और मनु भाकर की जोड़ी ने जीता है। सरबजोत के लिए यह ओलंपिक में पहला पदक है।
बताते चलें कि अभी मनु का 25 मीटर कि शूटिंग स्पर्धा मैं भाग लेना शेष है।
इस जीत से पूरे देश मैं ख़ुशी कि लहर दौड़ गयी है, हर तरफ से दोनों खिलाडियों और उनके परिवारीजनों को बधाई देने वाले लोगों का ताँता लगा हुआ है।
भारत की बेटी और जाट समाज का अभिमान मनु भाकर के कांस्य की बदौलत भारत ने पेरिस ओलंपिक्स (Paris Olympics) 2024 मैं कांस्य पदक के साथ अपना खाता खोला। भाकर ने कांस्य पदक जीतकर रचा इतिहास, निशानेबाजी में मनु कोई भी मेडल जीतने वाली वो पहली भारतीय महिला बन गयी हैं साथ ही 12 साल बाद निशानेबाजी मैं कोई पदक जीतकर उन्होंने भारत के सूखे को भी खत्म किया। उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल में ने 221.7 पॉइंट्स के साथ अपने पहले कांस्य पदक की दावेदारी पक्की की। वहीं कोरिया की ओह ये जिन ने 243.2 का ओलंपिक्स रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल जीता, जबकि उन्हीं के देश की येजि किम ने 241.3 के स्कोर के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
जीत के बाद काफी खुश नजर आयी भाकर ने कहा “पदक जीतना बहुत अच्छा लग रहा है। इस बार हमारी कोशिश होगी कि हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीत सकें। टीम बहुत मेहनत कर रही है, एक व्यक्ति के रूप में मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। ये ब्रॉन्ज़ है, अगली बार और बेहतर करने की कोशिश करूंगी।
कौन हैं मनु भाकर: हरियाणा के झज्जर की रहने वाली मनु के पिता मर्चेंट नेवी में चीफ इंजिनियर हैं। 14 साल की उम्र तक मनु बॉक्सिंग, टेनिस, स्केटिंग और मणिपुरी मार्शल आर्ट्स खेलती थीं। इन इवेंट्स में उन्होंने कई नेशनल मेडल्स भी जीत रखे थे, लेकिन अप्रैल 2016 में मनु पहली बार शूटिंग रेंज पहुंचीं और 15 दिन बाद ही हरियाणा ओपन टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीत लिया। इसके साथ ही उनका निशानेबाजी का सफर शुरू हो गया और इसके बाद उन्होंने साल 2017 की एशियन जूनियर चैंपियनशिप का सिल्वर मेडल जीत लिया। 2018 में ही मैक्सिको वर्ल्ड कप मैं दो गोल्ड मेडल जीतने वाली 16 साल की भाकर वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतने वाली सबसे युवा भारतीय शूटर बन गईं। और इसी साल हुई नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में भाकर ने कई बार की नेशनल चैंपियन हिना सिद्धू को न सिर्फ हराया बल्कि उनका नेशनल रिकॉर्ड भी तोड़ डाला। इस इवेंट में मनु ने कुल नौ गोल्ड मेडल जीते।
इस जीत से भारत मै जबस्दस्त उत्साह है, प्रधानमंत्री मोदी ने जहाँ इस जीत कि शुभकामनायें प्रेषित की वहीं हर भारतीय इसे अपनी जीत मानते हुए उत्सव मना रहा है। इस जीत के साथ ही सबकी निगाहें अब रजत और स्वर्ण पदकों पर टिक गयी हैं।
प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू योजना (सीआरएम) अंतर्गत फसल अवशेष वाले कृषि यंत्रों पर अनुदान का सुनहरा अवसर.
सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीड/स्मार्ट सीडर, सुपर सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर, श्रेडर, मल्चर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लैशर, सरफेस सीडर, सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर कम बाइंडर आदि के आवेदन हेतु बुकिंग दिनांक 02-07-2024 से 16-07-2024 रात्रि 12:00 बजे तक की जाएगी.
विभागीय पोर्टल https://agriculture.up.gov.in/ पर “यन्त्र अनुदान हेतु टोकन निकालें” पर क्लिक करके ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. कृषि यंत्रों के आवेदन हेतु बुकिंग किये जाने के लिए विभागीय पोर्टल पर पूर्व से उपलब्ध मोबाइल नम्बर पर ओटीपी प्राप्त करने का विकल्प होगा.
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आज जाट बुलेटिन परिवार के सभी सदस्य स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके द्वारा किए गए महान कार्यों को याद करते हैं। भारतीय राजनीति के इस अद्वितीय नेता और किसानों के प्रति उनकी असीम निष्ठा को हमेशा याद किया जाएगा। उनके योगदान आज भी भारतीय समाज में गूंज रहे हैं।
प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक यात्रा:
चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश के नूरपुर गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनका प्रारंभिक जीवन और परवरिश ग्रामीण परिवेश में हुई, जिसने उनमें किसानों की समस्याओं के प्रति गहरी संवेदना और समझ विकसित की। यही प्रारंभिक अनुभव उनके राजनीतिक दर्शन और कृषि सुधारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को आकार देने में महत्वपूर्ण रहे।
चरण सिंह ने 1930 के दशक की शुरुआत में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने सक्रिय भाग लिया और अपने साथियों तथा आम जनता का सम्मान और प्रशंसा अर्जित की। लेकिन उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्वतंत्रता के बाद का कार्यकाल रहा।
कृषि सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता:
चौधरी चरण सिंह शहरी केंद्रित नीतियों के घोर आलोचक थे, जो स्वतंत्रता के बाद के भारत में हावी थीं। उनका मानना था कि देश की असली ताकत उसके गाँवों में है और ग्रामीण भारत का विकास देश की समग्र प्रगति के लिए अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश में मंत्री और बाद में मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने कई भूमि सुधार नीतियों को लागू किया, जिनका उद्देश्य किसानों को सशक्त बनाना और जमींदारी व्यवस्था को समाप्त करना था।
उनकी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक उत्तर प्रदेश में जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम का लागू करना था। इस क्रांतिकारी कानून का उद्देश्य सामंती भूमि व्यवस्था को समाप्त करना और लाखों भूमिहीन किसानों को भूमि अधिकार प्रदान करना था, जिससे उस समय की सबसे गंभीर सामाजिक अन्याय की समस्याओं का समाधान हुआ।
प्रधानमंत्री का कार्यकाल और राष्ट्रीय प्रभाव :
किसानों और ग्रामीण विकास के प्रति चौधरी चरण सिंह की निरंतर वकालत ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया। 1979 में, वे भारत के प्रधानमंत्री बने, हालांकि उनका कार्यकाल बहुत छोटा था। इसके बावजूद, उनकी नीतियों और दृष्टिकोण का स्थायी प्रभाव रहा। उनके शासनकाल में ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादकता, और किसानों की भलाई पर जोर दिया गया।
उनके कार्यकाल में व्यापक कृषि सुधार, किसानों के लिए क्रेडिट सुविधाओं में सुधार, और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए। यद्यपि उनका कार्यकाल छोटा था, लेकिन उनकी कृषि नीतियों पर प्रभाव गहरा और स्थायी था।
विरासत और वर्तमान प्रासंगिकता:
चौधरी चरण सिंह का निधन 29 मई 1987 को हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है, जो वास्तव में ग्रामीण गरीबों की परवाह करते थे और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए अथक काम करते थे। किसानों की शक्ति में उनके विश्वास और राष्ट्रीय एजेंडे में उनके कल्याण को शामिल करने के प्रयास ने भविष्य के नीति निर्माताओं के लिए एक मिसाल कायम की।
वर्तमान समय में, जब किसान अधिकार, सतत कृषि, और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दे राष्ट्रीय बहस के केंद्र में हैं, चौधरी चरण सिंह के योगदान पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। उनकी दृष्टि आज भी उन आंदोलनों और नीतियों को प्रेरित करती है, जो आर्थिक समानता और सामाजिक न्याय प्राप्त करने के उद्देश्य से कार्य कर रहे हैं।
एक व्यक्तिगत प्रतिबिंब:
चौधरी चरण सिंह जी के जीवन और विरासत पर विचार करते समय, यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि उनका कार्य केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि गहरी मानवतावादी दृष्टिकोण से प्रेरित था। उनका जीवन मिशन यह था कि एक राष्ट्र की समृद्धि उसके किसानों की भलाई से जुड़ी होती है।
आज, जब हम उनके योगदान को याद करते हैं, आइए हम भी उन मूल्यों और सिद्धांतों को पुनः पुष्टि करें, जिनके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया। चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर, हम सभी उन्हें नमन करते हैं और उनकी महान विरासत को सलाम करते हैं।
चौधरी चरण सिंह जी की विरासत के तत्व:
कृषि विकास: चौधरी चरण सिंह ने हमेशा ग्रामीण विकास और किसानों की भलाई को प्राथमिकता दी। उन्होंने कई ऐसे सुधार किए जो आज भी किसानों को लाभान्वित कर रहे हैं।
समाजवाद: उनके नेतृत्व में समाजवाद का सिद्धांत ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत हुआ। उन्होंने समाज के सबसे कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए नीतियों को लागू किया।
शिक्षा और स्वास्थ्य: चौधरी चरण सिंह ने ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। उनका मानना था कि ग्रामीण विकास के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है।
राष्ट्रवाद और स्वाभिमान: उनका जीवन भारतीयता के मूल्यों और ग्रामीण आत्म-सम्मान के सिद्धांतों से प्रेरित था। वे किसानों को उनके अधिकारों और स्वाभिमान के लिए जागरूक करने में विश्वास रखते थे।
चौधरी चरण सिंह जी की सीखें:
चौधरी चरण सिंह जी का जीवन और उनके कार्य आज भी हमें प्रेरित करते हैं। उनका दृष्टिकोण और उनके सिद्धांत हमें यह सिखाते हैं कि सच्चे नेतृत्व का मतलब केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करना है। उनके द्वारा स्थापित मूल्य और सिद्धांत आने वाले पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक रहेंगे।
निष्कर्ष:
चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर, हम सभी को उनके द्वारा किए गए महान कार्यों को याद करते हुए, उनके आदर्शों और सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। उनकी विरासत हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी और भारतीय समाज के विकास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। आइए, हम सभी मिलकर उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
स्मार्टफोन चलाने वाले (स्मार्टफोन यूजर्स) जागरूक जाट युवक-युवतियों के लिए जाट समाज की सेवा का भाव और उनको अतिरिक्त आय में प्रदान करने के लिए जाट बुलेटिन लाया है ‘जाट हेल्पलाइन’ ।
जाट समाज के प्रथम एप “जाट बुलेटिन” द्वारा जाट युवक एवं युवतियों के सहयोग से जाट समाज के आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्र/छात्राओं की * शिक्षा * कैरियर/रोजगार * उपचार/चिकित्सा * शादी-विवाह * कानूनी मदद * और सरकारी मदद दिलाने के उद्देश्य को पूर्ण करने का बीड़ा उठाया है।
जाट बुलेटिन के साथ स्वेच्छाभाव से जुड़ने वाले स्मार्टफ़ोनधारी अपनी सुविधानुसार ग्राम, ब्लॉक, तहसील या जिलास्तर पर कार्य कर सकते हैं। इस बारे में जाट बुलेटिन के संपादक विजय चौधरी ने बताया कि हमारे साथ जुड़ने वाले सभी युवक/युवती अपने सामान्य कार्य, नौकरी या अध्ययन करते हुए भी जाट समाज की भलाई, जाट समाज के कार्यक्रमों की कवरेज, अपने आसपास के शिक्षा, खेल, सरकारी नौकरी अथवा अन्य क्षेत्रों में मेधावी जाट पाल्यों की सूची आदि के माध्यम से समाज सेवा कर सकते हैं। इस समाज सेवा के बदले में इन सभी स्वेच्छाभावियों को जाट बुलेटिन अपनी विज्ञापन से होने वाली आय में से उनकी सेवाओं के अनुसार भुगतान भी करेगा।
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