सर छोटू राम: दीनबंधु और रहबर-ए-आज़म
सर छोटू राम (24 नवंबर 1881 – 9 जनवरी 1945) अविभाजित भारत के एक अद्वितीय राजनेता, समाज सुधारक और विचारक थे। उन्होंने शोषित, दबे-कुचले और कर्ज़ में डूबे किसानों को स्वाभिमान से जीना सिखाया। जनमानस द्वारा उन्हें आदर से "दीनबंधु" और "रहबर-ए-आज़म" की उपाधि दी गई।
प्रारंभिक जीवन और संघर्ष
- जन्म: 24 नवंबर 1881 को गढ़ी सांपला (ज़िला रोहतक, हरियाणा) के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनका वास्तविक नाम राम रिछपाल था, लेकिन परिवार में सबसे छोटे होने के कारण उन्हें प्यार से "छोटू" कहा जाता था।
- शिक्षा: गाँव से प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से 1905 में संस्कृत से स्नातक किया और 1911 में आगरा से वकालत (LL.B.) की उपाधि प्राप्त की।
- चेतना का उदय: छात्र जीवन में पिता के साथ साहूकार के पास जाने पर मिले अपमानजनक व्यवहार ने उनके मन में महाजनी शोषण के विरुद्ध आजीवन संघर्ष का संकल्प भर दिया।
राजनीतिक जीवन और यूनियनिस्ट पार्टी की स्थापना
1923 में सर छोटू राम ने सर फ़ज़ल-ए-हुसैन के साथ मिलकर 'नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी' (ज़मींदार लीग) का गठन किया। यह दल धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर आर्थिक वर्ग—विशेषकर किसानों और कामगारों के अधिकारों के लिए समर्पित था।
- 1924 में वे पंजाब सरकार में कृषि और उद्योग मंत्री बने।
- 1937 के चुनावों के बाद पंजाब प्रांत के राजस्व मंत्री (Revenue Minister) के रूप में उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व क़ानून पारित करवाए।
किसानों के मसीहा: ऐतिहासिक क़ानूनी सुधार
- पंजाब साहूकार पंजीकरण अधिनियम (1930): साहूकारों के लिए लाइसेंस लेना और बहीखातों का सरकारी ऑडिट कराना अनिवार्य किया गया।
- कर्ज़मुक्ति अधिनियम (1934/1936): मूलधन के बराबर ब्याज चुका देने पर कर्ज़ को समाप्त मान लिया गया। साथ ही किसानों के हल, बैल, दूधारू पशु और रहने का मकान कुर्क करने पर पूरी रोक लगा दी गई।
- गिरवी ज़मीन की बहाली अधिनियम (1938): 1901 से पहले कौड़ियों के भाव गिरवी रखी गई किसानों की लाखों एकड़ ज़मीन बिना किसी मुआवज़े के मूल मालिकों को वापस दिलाई गई।
- कृषि उपज मंडी अधिनियम (1939): किसानों की फ़सलों की सही तौल और उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए 'मार्केटिंग बोर्ड' का गठन किया गया, जिससे आढ़तियों की मनमानी पर अंकुश लगा।
भाखड़ा नांगल बाँध के स्वप्नदृष्टा
उत्तर भारत को हरित क्रांति की राह पर लाने वाले भाखड़ा नांगल बाँध की मूल परिकल्पना सर छोटू राम की ही थी। बाँध निर्माण के लिए बिलासपुर के राजा के साथ जल-अधिकारों का ऐतिहासिक समझौता 1944 में उनके अथक प्रयासों से संभव हुआ। यद्यपि यह परियोजना उनके निधन के बाद पूरी हुई, परंतु इसकी वास्तविक नींव उन्होंने ही रखी थी।
उपाधियाँ और जन-जागृति
- उपाधियाँ: ब्रिटिश हुकूमत ने 1937 में उन्हें 'नाइटहुड' (सर) की उपाधि दी, जबकि किसानों ने उन्हें 'दीनबंधु' (ग़रीबों के बंधु) और 'रहबर-ए-आज़म' (महान मार्गदर्शक) का ख़िताब दिया।
- 'जाट गज़ट' अख़बार: 1916 में रोहतक से साप्ताहिक पत्र जाट गज़ट शुरू कर किसानों को शिक्षित, संगठित और अधिकारों के प्रति सचेत किया।
सर छोटू राम का प्रसिद्ध संदेश आज भी गूँजता है: "ऐ किसान, दो बातें सीख ले: एक बोलना सीख, और दूसरा दुश्मन को पहचानना सीख।" 9 जनवरी 1945 को लाहौर में इस महान युगपुरुष का निधन हुआ।