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गेहूं की बुवाई 2026: सही समय, उन्नत किस्में, बीज की मात्रा और खाद की पूरी जानकारी

🌾 Jat Bulletin डेस्क • 📅 05 Nov 2026 • 👁️ 0 पाठक • ⏱️ ~3 मिनट पठन
रबी 2026-27 का सीजन शुरू हो चुका है और गेहूं की बुवाई की तैयारी का सही समय यही है। गेहूं की उपज का बड़ा हिस्सा खेत में बीज डालने से पहले ही तय हो जाता है.
गेहूं की बुवाई 2026: सही समय, उन्नत किस्में, बीज की मात्रा और खाद की पूरी जानकारी

रबी मौसम की फसलों में गेहूं भारत के किसानों के लिए सबसे प्रमुख और लाभकारी खाद्यान्न फसल है। वर्ष 2026 में बेहतर उपज और अधिक मुनाफा प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि वैज्ञानिक तौर-तरीकों को अपनाया जाए। समय पर बुवाई, उपयुक्त उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित खाद-उर्वरक प्रबंधन और सही सिंचाई से उत्पादन लागत को कम करके रिकॉर्ड पैदावार हासिल की जा सकती है।

किसान भाइयों के लिए विशेष टिप: खाद और बीजों का प्रयोग करने से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच (Soil Health Card) अवश्य करवाएं। स्थानीय मौसम और परिस्थितियों के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के परामर्श को प्राथमिकता दें।

1. गेहूं की खेती: एक नज़र में

पहलू सामान्य अनुशंसा
बुवाई का उपयुक्त समय 1 नवंबर से 25 नवंबर (सिंचित एवं समय पर बुवाई हेतु)
बीज दर 40–45 किग्रा प्रति एकड़ (सामान्य बुवाई) | 50–55 किग्रा प्रति एकड़ (देर से बुवाई)
कतार से कतार की दूरी 20–22.5 सेमी (समय पर) | 18–20 सेमी (देर से बुवाई)
बुवाई की गहराई 4 से 5 सेमी
सिंचाई की संख्या 4 से 6 सिंचाई (फसल की प्रमुख क्रांतिक अवस्थाओं पर)

2. उपयुक्त जलवायु और खेत की तैयारी

गेहूं मूलतः शीतोष्ण (ठंडे) मौसम की फसल है। अंकुरण के लिए 20–22 डिग्री सेल्सियस और वानस्पतिक बढ़वार के लिए 15–20 डिग्री सेल्सियस का तापमान आदर्श माना जाता है। दाना पकते समय तापमान 25–30 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होना चाहिए।

खेत की तैयारी के चरण

  1. खरीफ फसल (धान आदि) की कटाई के बाद पहली गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें।
  2. इसके बाद 2 से 3 बार कल्टीवेटर या हैरो चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
  3. हर जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत को पूरी तरह समतल करें, ताकि सिंचाई का पानी समान रूप से फैल सके।
  4. अंतिम जुताई के समय 4–5 टन प्रति एकड़ अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद (FYM) मिट्टी में मिला दें।

3. गेहूं की बुवाई का सही समय

बुवाई की स्थिति उपयुक्त समय ध्यान रखने योग्य बातें
असिंचित (बारानी) 20 अक्टूबर से 5 नवंबर मिट्टी में संचित नमी का ध्यान रखकर ही बुवाई करें।
सिंचित (समय पर) 1 नवंबर से 25 नवंबर सर्वाधिक पैदावार देने वाला समय; उपयुक्त किस्में ही चुनें।
सिंचित (पछेती/देर से) 26 नवंबर से 25 दिसंबर कम अवधि में पकने वाली पछेती किस्मों का ही चयन करें।

4. प्रमुख उन्नत और रोगरोधी किस्में (2026)

जलवायु परिवर्तन और समय से पहले तापमान बढ़ने (टर्मिनल हीट) की समस्या से निपटने के लिए नई और गर्मी सहनशील किस्मों को प्राथमिकता दें:

समय पर बुवाई हेतु प्रमुख किस्में

  • HD 3226 (पूसा यशस्वी): करनाल बंट और पीला रतुआ प्रतिरोधी, उच्च प्रोटीन युक्त (औसत उपज: 24–26 क्विंटल/एकड़)।
  • HD 3086 (पूसा गौतमी): सिंचित क्षेत्रों में सर्वाधिक लोकप्रिय, मजबूत तना जो गिरने से बचाता है।
  • DBW 187 (करण वंदना): रोगरोधी, उत्तर-पूर्वी व उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों के लिए अत्यंत उपयुक्त।
  • DBW 222 (करण नरेंद्र): उच्च उत्पादन क्षमता और रोटी बनाने के लिए उत्कृष्ट गुणवत्ता।
  • PBW 826: हाल ही में विकसित गर्मी-सहनशील और अधिक पैदावार देने वाली किस्म।

देर से बुवाई हेतु उपयुक्त किस्में

  • HD 3059 (पूसा विशाली): दिसंबर माह की बुवाई के लिए उत्कृष्ट, 115–120 दिनों में तैयार।
  • DBW 173: पछेती बुवाई में भी बेहतर दाना भराव क्षमता।
  • WR 544 (पूसा गोल्ड): सीमित सिंचाई और देर से बुवाई के अनुकूल।

5. बीज दर और बीज उपचार विधि

उत्तम अंकुरण और पौधों की सही संख्या के लिए बीज की मात्रा और उपचार अनिवार्य है:

बीज दर

  • सामान्य बुवाई: 40 से 45 किलोग्राम प्रति एकड़।
  • देर से बुवाई या मोटा दाना: 50 से 55 किलोग्राम प्रति एकड़।

बीज उपचार (Seed Treatment)

  1. फफूंदजनित रोगों से बचाव (कंगुआ/झुलसा): थीरम (75% WP) 2 ग्राम + कार्बेन्डाजिम (50% WP) 1 ग्राम प्रति किलो बीज, या टेबुकोनाजोल (2% DS) 1.25 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करें।
  2. दीमक और जड़ माहू से बचाव: क्लोरपायरीफॉस (20% EC) 3–4 मिली या इमिडाक्लोप्रिड (17.8% SL) 1–2 मिली प्रति किलो बीज की दर से उपचार करें।
  3. जैव उर्वरक संवर्धन: रासायनिक उपचार के बाद अंत में एजोटोबैक्टर और पीएसबी (PSB) कल्चर (10 ग्राम प्रति किलो बीज) से उपचारित कर छाया में सुखाएं।

6. संतुलित खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

गेहूं की अच्छी बढ़वार और दानों में चमक के लिए उर्वरकों का संतुलित प्रयोग (प्रति एकड़ आधार पर):

उर्वरक मात्रा (प्रति एकड़) प्रयोग का समय और तरीका
DAP (डाई अमोनियम फास्फेट) 50–55 किग्रा (1 बोरी) बुवाई के समय आखिरी जुताई में (कूड़ों में दें)
MOP (म्यूरेट ऑफ पोटाश) 20–25 किग्रा बुवाई के समय आधार खाद के रूप में
यूरिया 90–100 किग्रा (कुल) तीन भागों में: 1/3 बुवाई पर, 1/3 पहली सिंचाई पर, 1/3 दूसरी सिंचाई पर
जिंक सल्फेट (21%) 10 किग्रा बुवाई के समय खेत की तैयारी में (DAP से अलग रखें)
सावधानी: डीएपी (DAP) और जिंक सल्फेट को कभी भी एक साथ मिलाकर न डालें, अन्यथा रासायनिक क्रिया से दोनों की प्रभावशीलता खत्म हो जाती है।

7. सिंचाई का सही समय सारणी

गेहूं में 4 से 6 हल्की सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। निम्नलिखित क्रांतिक अवस्थाओं पर खेत में नमी बनाए रखना आवश्यक है:

  1. ताजमूल अवस्था (CRI Stage): बुवाई के 20–25 दिन बाद (यह सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई है)।
  2. कल्ले फूटते समय (Tillering): बुवाई के 40–45 दिन बाद।
  3. गांठ बनते समय (Jointing): बुवाई के 60–65 दिन बाद।
  4. फूल आने की अवस्था (Flowering): बुवाई के 80–85 दिन बाद।
  5. दूधिया अवस्था (Milking): बुवाई के 100–105 दिन बाद।
  6. दाना पकते समय (Dough Stage): बुवाई के 115–120 दिन बाद (हल्की हवा में सिंचाई करें ताकि फसल न गिरे)।

8. खरपतवार नियंत्रण

गेहूं की फसल में चौड़ी पत्ती (बथुआ, सेंजी, कृष्णनील) और संकरी पत्ती (गुल्ली डंडा/मंडूसी, जंगली जई) दोनों प्रकार के खरपतवार समस्या बनते हैं:

  • बुवाई के तुरंत बाद (Pre-emergence): बुवाई के 0 से 2 दिन के भीतर पेंडीमेथालिन (30% EC) 1.2–1.5 लीटर प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर समान रूप से छिड़कें।
  • बुवाई के 30–35 दिन बाद (Post-emergence):
    • केवल चौड़ी पत्ती के लिए: 2,4-D अमाइन साल्ट या मेटसल्फ्यूरोन मिथाइल (20% WP) 8 ग्राम प्रति एकड़।
    • मिश्रित खरपतवारों के लिए: सल्फोसल्फ्यूरॉन + मेटसल्फ्यूरॉन का तैयार मिश्रण अनुशंसित मात्रा में छिड़कें।

9. प्रमुख रोग एवं कीट नियंत्रण

  • पीला रतुआ (Yellow Rust): पत्तियों पर पीले रंग की धारियों के रूप में चूर्ण दिखाई देना। रोकथाम हेतु प्रोपिकोनाजोल (25% EC) 200 मिली प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
  • दीमक (Termite): खड़ी फसल में प्रकोप होने पर सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपायरीफॉस का प्रयोग करें।
  • माहू (Aphid): बालियों का रस चूसने पर इमिडाक्लोप्रिड का हल्का छिड़काव शाम के समय करें।

10. कटाई, मड़ाई और सुरक्षित भंडारण

  1. जब बालियां पूरी तरह सुनहरी पीली हो जाएं और दानों में नमी 15% से कम रह जाए, तब फसल की कटाई करें।
  2. थ्रेशर से मड़ाई के बाद दानों को 2–3 दिन अच्छी धूप में सुखाएं ताकि नमी घटकर 10–12% तक आ जाए।
  3. भंडारण के लिए बोरियों और कोठिलों को अच्छी तरह साफ व रोगाणुरहित करें और सुरक्षित स्थान पर रखें।
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