जाट समाज की विभूति एवं मेधावी सम्मान के साथ विशाल स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया..
मथुरा। महाराजा सूरजमल स्मृति न्यास द्वारा डैंपियर नगर स्थित किसान भवन में हिंदू हृदय सम्राट, भरतपुर के संस्थापक अजेय महाराजा सूरजमल का 261 वां बलिदान दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य सत्यप्रिय आर्य द्वारा वैदिक हवन करवाकर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मा.मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी तथा विशिष्ट अतिथि सांसद तेजवीर सिंह चौधरी रहे। कार्यक्रम में मा. मंत्री द्वारा महाराजा सूरजमल के आदर्शों पर चलने, संगठित रहने तथा महापुरुषों के जीवन चरित्र से बच्चों को संस्कारित करने पर जोर दिया। तथा जाट केसरी की उपाधि से हास्य कवि सबरस मुरसानी, अरविंद चौधरी, एथलीट मोहन सिंह आर्य तथा एड.राजप्रकाश चिकारा को सम्मानित किया। वहीं सांसद तेजवीर सिंह ने वर्तमान समय में जाट समाज की उन्नति पर संतोष व्यक्त करते हुए एकजुटता की कमी पर कठोर शब्दों में डांट भी पिलाई। श्री सिंह द्वारा राष्ट्रीय एयर राइफल शूटर मीनेश जुरैल, कथा वाचक रिया फौजदार, शिक्षिका प्रदीपिका फौजदार तथा ज्योति चौधरी को जाट गरिमा तथा रामप्रकाश कुंतल, रामवीर, शांतनु छौंकर, शैलेन्द्र सिंह नरवार, डॉ दीपू चौधरी, फ्लाइंग अफसर रजत सिंह, बॉक्सर विष्णु चौधरी, सचिव चिंटू कुमार कुंतल, हॉकी प्लेयर यश चौधरी, तनुज चौधरी, मोहित चौधरी, जनार्दन पहलवान, डॉ दुष्यंत चौधरी तथा शुभम चौधरी को जाट रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया।
उपस्थित जनसमूह को किसान नेता व न्यास के कोषाध्यक्ष राजकुमार सिंह तोमर, महेंद्र चौधरी, योगेन्द्र फौजदार, चौ गुलवीर सिंह, हरिपाल सिंह, कृष्ण जन्मभूमि न्यास के एड. महेंद्र सिंह आदि ने संबोधित किया और महाराजा सूरजमल के विचार और संस्कार अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन न्यास के ट्रस्टी व महासचिव चौधरी विजय आर्य ने तथा धन्यवाद न्यास के अध्यक्ष आर बी चौधरी ने दिया।
इस अवसर पर डॉ परमिंदर सिंह के संयोजन में आयोजित स्वास्थ्य कैंप में चिकित्सकों द्वारा लगभग दो सैकड़ा से अधिक लोगों को निशुल्क परीक्षण एवं परामर्श प्रदान किया गया। वहीं सत्तर वर्ष से अधिक आयु वाले आधा सैकड़ा वृद्धों के आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए।
कार्यक्रम में जगवीर चौधरी, हितेंद्र सिंह चौधरी, सूरजपाल सिंह, हरेश कुमार सिंह, अमित सिकरवार, पुष्पेंद्र सिंह भरऊ, पवन चौधरी, इंजी. सुरेन्द्र सिंह, सचिव हरेंद्र चौधरी, ज्वाला सिंह, रामकुमार सिंह, राजेश सोलंकी, दीवान सिह, विनीता वर्मा, डॉ जयकुमार, उमाशंकर सिंह, रेनू सिंह, भाजपा नेत्री डॉ मेघना चौधरी, सुजाता चौधरी, हेमलता चौधरी आदि का सहयोग रहा। उपस्थित जनों में किसान नेता बुद्धासिंह, प्रधान सूरज सिंह, मानवेंद्र कुमार, नागेंद्र कुमार, सुभाष चौधरी, कर्मवीर छौंकर, मौनी ताऊ, अरविंद चौधरी, पुनीत चौधरी, भानुप्रताप सिंह, शिवकुमार चौधरी, एड.विजयेंद्र वैदिक, बार के पूर्व अध्यक्ष आलोक सिंह, एड. हाकिम सिंह, महावीर सिंह, रनवीर सिंह, जयवीर सिंह, रघुनाथ सिंह, एड. विक्रम सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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मथुरा। भारतीय इतिहास में वीरता, साहस और देशभक्ति की अद्वितीय मिसाल, भरतपुर के संस्थापक और हिन्दू शिरोमणि महाराजा सूरजमल की स्मृति में कल यानी 25 दिसंबर 2024 को महाराजा सूरजमल स्मृति न्यास द्वारा डेम्पियर नगर स्थित किसान भवन मैं हवन एवं विचार गोष्टी का आयोजन किया गया है। समिति के पदाधिकारियों ने विशेष वार्ता मैं बताया कि महाराजा सूरजमल, जिन्हें जाट समाज के गौरव के रूप में जाना जाता है, ने अपनी अद्वितीय नीतियों और पराक्रम से मुगलों और विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ हिंदू स्वाभिमान की रक्षा की।
उनके 261वें बलिदान दिवस पर हर साल कि तरह इस बार भी समिति महापुरुषों के जीवन से नयी पीड़ी को अवगत करवाने, जाट समाज कि प्रतिभाओं का सम्मान कर प्रोत्साहित करने और समाज मैं जागरूकता जगाने के लिए विचार गोष्ठी के साथ साथ इस बार निशुल्क जाँच शिविर का आयोजन भी कर रही है।
पदाधिकारियों ने बताया कि महाराजा सूरजमल का जीवन आज भी हमें साहस, स्वाभिमान और न्याय के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता है। उनके बलिदान दिवस को मनाना न केवल उनके प्रति श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों से प्रेरित करने का एक प्रयास भी है। कार्यक्रम मैं मुख्य अतिथि के रूप मैं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी एवं विशिष्ट अतिथि संसद तेजवीर सिंह व जिला पंचायत अध्यक्ष किशन सिंह होंगे।
महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों मैं कई सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें महाराजा सूरजमल के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां, कवि सम्मेलन, और उनके योगदान पर व्याख्यान शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक और बड़ा आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना 2024 के तहत अगला सामूहिक विवाह कार्यक्रम 12 दिसंबर 2024 को आयोजित होगा। इस योजना के तहत सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता प्रदान करती है, जिससे उनके जीवन में खुशी और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
विषय सूची
क्या है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना?
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक अनूठी पहल है, जिसमें गरीब परिवारों की बेटियों और बेटों का विवाह सामूहिक रूप से संपन्न कराया जाता है। इस योजना का उद्देश्य न केवल आर्थिक सहायता देना है, बल्कि सामाजिक समानता और सामूहिक विवाह की परंपरा को बढ़ावा देना भी है।
अगले आयोजन की तारीख:
तारीख: 12 दिसंबर 2024
स्थान: हर जिले के निर्धारित सामूहिक विवाह स्थल (स्थानीय प्रशासन द्वारा तय किया जाएगा)।
समय: सुबह 10 बजे से कार्यक्रम शुरू होगा।
मुख्य विशेषताएं:
आर्थिक सहायता:
प्रत्येक जोड़े को ₹51,000 की आर्थिक मदद दी जाएगी (इस योजना में दाम्पत्य जीवन में खुशहाली एवं गृहस्थी की स्थापना हेतु कन्या के खाते में रू0 35,000/- की धनराशि का अनुदान एवं विवाह संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री रू0 10,000/- की धनराशि से क्रय करते हुए प्रदान किया जाता है तथा प्रत्येक जोड़े के विवाह आयोजन पर रू0 6,000/- की धनराशि व्यय किये जाने की व्यवस्था है)।
यह राशि शादी के आयोजन और नवविवाहित जोड़ों की जरूरतों को पूरा करने के लिए दी जाती है।
सामूहिक आयोजन:
सामूहिक विवाह में सभी धर्मों और जातियों के जोड़े भाग ले सकते हैं।
हर धर्म और समुदाय की परंपराओं का सम्मान करते हुए विवाह संपन्न कराया जाता है।
सरकार की देखरेख में कार्यक्रम:
आयोजन की सारी व्यवस्था जिला प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा की जाएगी।
विवाह स्थल पर वर-वधू के लिए भोजन, आवास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कैसे करें आवेदन?
यदि आप इस योजना में भाग लेना चाहते हैं, तो निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करें:
“मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना” के विकल्प पर क्लिक करें।
2. फॉर्म भरें:
वर और वधू की जानकारी के साथ सभी आवश्यक विवरण भरें।
दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र आदि अपलोड करें।
पात्रता:
परिवार की वार्षिक आय ₹2 लाख से कम होनी चाहिए।
वर की आयु 21 वर्ष और वधू की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
लाभार्थी उत्तर प्रदेश के निवासी होने चाहिए।
योजना का उद्देश्य:
गरीब परिवारों को शादी के भारी खर्च से राहत देना।
सामूहिक विवाह के माध्यम से समाज में दहेज प्रथा और आर्थिक असमानता को खत्म करना।
समाज में सामूहिकता और समरसता की भावना को बढ़ावा देना।
आवश्यक दस्तावेज
आधार कार्ड (वर व वधू)
कन्या के परिवार का आय प्रमाण पत्र
निवास प्रमाण पत्र
जाति प्रमाण पत्र (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछडा वर्ग की दशा में)
वर-वधू की फोटो
मोबाइल नंबर
बैंक खाता विवरण
अगर आप या आपका कोई परिचित इस योजना में शामिल होना चाहता है, तो आवेदन प्रक्रिया तुरंत शुरू करें। इस कार्यक्रम में भाग लेकर आप सरकार की इस कल्याणकारी पहल का हिस्सा बन सकते हैं।
योजना की विस्तृत जानकारी के लिए या किसी भी अन्य जानकारी के लिए विभाग की वेबसाइट पर जाएँ अथवा अपने जिले के समाज कल्याण अधिकारी से संपर्क करें या फिर हेल्पलाइन नंबर 0522-3538700 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों और श्रमिकों को आर्थिक सहायता, आधुनिक उपकरण, और प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस योजना के माध्यम से पारंपरिक उद्योगों जैसे कुम्हार, बढ़ई, लोहार, दर्जी आदि में काम करने वाले श्रमिकों की आय को बढ़ाना और उनके व्यवसाय को आधुनिक बनाना है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का उद्देश्य राज्य के पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक और उपकरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकें। इस योजना के तहत सरकार कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण और उपकरण मुहैया कराती है, ताकि उनकी कला और कौशल को बढ़ावा मिले और वे आत्मनिर्भर बन सकें।
योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो पारंपरिक रूप से लकड़ी का काम, कपड़ा बुनाई, लोहार का काम, मिट्टी के बर्तन बनाना जैसे पारंपरिक कार्यों में संलग्न हैं। इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे अपने व्यवसाय को आधुनिक मांग के अनुसार ढाल सकें।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के मुख्य बिंदु
योजना का नाम
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना
उद्देश्य
पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराना
शुरुआत
2018
लक्ष्य क्षेत्र
पारंपरिक हस्तशिल्प और शिल्प कौशल
विभाग
उत्तर प्रदेश श्रम विभाग
वर्तमान स्थिति
सक्रिय
आवेदन मोड
ऑनलाइन
आर्थिक सहायता
उपकरण अनुदान, प्रशिक्षण, और वित्तीय सहायता
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभ
निःशुल्क प्रशिक्षण: योजना के तहत कारीगरों को आधुनिक तकनीक में निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है।
उपकरण सहायता: कारीगरों को सरकार द्वारा निःशुल्क आधुनिक उपकरण दिए जाते हैं, ताकि वे अपने कार्य को और बेहतर कर सकें।
आर्थिक सहायता: कारीगरों को अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता भी दी जाती है, जिसमें कच्चे माल की खरीद और कार्यशालाएं स्थापित करना शामिल है।
स्वरोजगार को बढ़ावा: योजना के माध्यम से कारीगरों को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलता है, जिससे वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत की जाने वाली आवेदन प्रक्रिया को सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है, ताकि आवेदक इसमें अपना आवेदन आसानी से कर सकें। निम्नलिखित चरणों का पालन करके आप इस योजना में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:
Step-1: विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले, अपने कंप्यूटर या मोबाइल पर इंटरनेट ब्राउज़र खोलें और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के आवेदन हेतु आधिकारिक वेबसाइट https://diupmsme.upsdc.gov.in पर जाएं।
Step-2: हेडर सेक्शन मैं “Login” पर क्लिक करें: होमपेज पर आपको हेडर सेक्शन मैं “Login” का ऑप्शन मिलेगा, इस पर क्लिक करके के बाद आपको “Applicant Login” पर भी क्लिक करना है।
स्टेप 3: नया रजिस्ट्रेशन करें: आपके सामने एक नया पेज खुलेगा, जिसमें आपको “New Registration” विकल्प को चुनना है, जिसके पश्चात् आपको स्कीम सेलेक्ट करके अपना नाम, जन्म की तारीख, पिता का नाम, मोबाइल नंबर आदि महत्वपूर्ण जानकारी भरकर “Submit” का बटन पर क्लिक करना है।
स्टेप 4: Username तथा Password सुरक्षित करें: प्रक्रिया पूर्ण होने पर आपको आपका “Username तथा Password” मिलेगा जिसे कहीं नोट करके सुरक्षित रखें और किसी से साझा न करें।
Step-5: आवेदन के लिए लॉगिन करें: अब आपको “Registered User” पर लॉगिन करना है जिसके बाद आपके सामने योजना के लिए प्रार्थना पत्र खुल जायेगा, जिसमे आपको मांगी गयी सभी जानकारियां (व्यक्तिगत व बैंक सम्बन्धी) सही से भरनी हैं। साथ ही आपको विभाग द्वारा मांगे गए दस्तावेज भी प्रार्थना पत्र के साथ अपलोड करने हैं।
Step-6: Applicant Number: अब प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात् आपको एक “Applicant Number” मिलेगा जो आपको सुरक्षित रखना है साथ ही प्रार्थना पत्र की एक प्रति भी सुरक्षित कर लें, जो भविष्य मैं आपको अपने आवेदन की स्थिति जानने मैं मदद करेगा।
योजना के लिए पात्रता
योजना के तहत लाभ पाने के लिए कुछ पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं:
आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
आवेदक पारंपरिक शिल्प कार्यों में संलग्न होना चाहिए, जैसे कि लकड़ी का काम, बुनाई, लोहार का काम, इत्यादि।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग या गरीबी रेखा के नीचे आने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
निवास प्रमाण पत्र (स्थायी निवासी प्रमाणित करने के लिए)
आय प्रमाण पत्र (आर्थिक योग्यता के लिए)
व्यवसाय प्रमाण पत्र (पारंपरिक शिल्प कार्य में संलग्न होने का प्रमाण)
बैंक खाता विवरण (आर्थिक सहायता के हस्तांतरण के लिए)
पासपोर्ट साइज फोटो
ऋण/सहायता
योजना के तहत निम्नलिखित सहायता प्रदान की जाती है:
उपकरण अनुदान: कारीगरों को नए उपकरण मुफ्त या सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
आर्थिक सहायता: कच्चे माल की खरीद और व्यवसाय के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
प्रशिक्षण सहायता: कारीगरों को मुफ्त में कौशल विकास और आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाता है।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लिए कौन पात्र है? उत्तर प्रदेश के पारंपरिक कारीगर, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आते हैं, इस योजना के लिए पात्र हैं।
इस योजना के तहत कारीगरों को क्या लाभ मिलते हैं? मुफ्त प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, और व्यवसाय के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता मिलती है।
इस योजना में आवेदन कैसे करें? आप ऑनलाइन सरकारी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की एक ऐसी पहल है, जो पारंपरिक कारीगरों और श्रमिकों को न सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है, बल्कि उनके हुनर को नई पहचान भी दिलाती है। इस योजना के माध्यम से कारीगर न सिर्फ अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपने व्यवसाय को भी आधुनिक और प्रतिस्पर्धात्मक बना सकते हैं। यह योजना आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदान देती है और प्रदेश के श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार करती है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारों के लिए “यूपी पत्रकार पेंशन योजना” के अंतर्गत पेंशन देने का फैसला किया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के 60 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जिससे वे अपने जीवन के अंतिम चरण में आर्थिक दृष्टि से सशक्त हो सकें। सरकार की इस पहल के तहत पात्र पत्रकारों को मासिक पेंशन दी जाएगी। योजना का उद्देश्य उन पत्रकारों को सम्मान देना है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अब वृद्धावस्था में किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। योजना का संचालन सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा किया जायेगा।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, यूपी ने योजना को जल्द से जल्द लागू करने के लिए 60 साल या इससे अधिक आयु के पत्रकारों का विवरण एक सप्ताह के अंदर देने को कहा है। इसके अलावा उन राज्यों से भी योजना का विवरण माँगा है जहाँ इस तरह की योजनायें चल रही हैं।
विषय सूची:
यूपी पत्रकार पेंशन योजना का उद्देश्य और महत्व
यूपी पत्रकार पेंशन योजना का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ पत्रकारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। पत्रकारों का काम सिर्फ खबरों को प्रसारित करना नहीं होता, बल्कि वे समाज के लिए एक अहम भूमिका निभाते हैं। कई पत्रकार आर्थिक तंगी के कारण अपने जीवन के अंतिम चरण में कठिनाईयों का सामना करते हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर न हों और उन्हें वृद्धावस्था में सम्मानजनक जीवन मिल सके।
यूपी पत्रकार पेंशन योजना के प्रमुख बिंदु
योजना का नाम
यूपी पत्रकार पेंशन योजना
योजना का शुभारम्भ
अगली सूचना की प्रतीक्षा है
आवेदन की शुरुवात
अगली सूचना की प्रतीक्षा है
योजना का कार्यक्षेत्र
समस्त उत्तर प्रदेश राज्य
योजना के लाभार्थी
60 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकार
आवेदन का प्रकार
ऑनलाइन/ऑफलाइन
आधिकारिक वेबसाइट
जल्द जारी की जाएगी
हेल्पलाइन नंबर
किया जायेगा
यूपी पत्रकार पेंशन योजना के तहत पेंशन पाने के लिए पात्रता:
आवेदक पत्रकार की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
पत्रकारिता के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्षों का अनुभव होना चाहिए।
आवेदक को उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मीडिया में कार्यरत रहे पत्रकार ही योजना के लिए पात्र होंगे।
यूपी पत्रकार पेंशन योजना के तहत मिलने वाली पेंशन राशि ?
यूपी सरकार ने यूपी पत्रकार पेंशन योजना के तहत पत्रकार को मिलने वाली पेंशन राशि की घोषणा सर्कार द्वारा योजना के विस्तार के साथ जल्द ही की जाएगी। यह राशि लाभार्थी के बैंक खाते में हर महीने ट्रांसफर की जाएगी। पेंशन की यह राशि पत्रकार की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी और उन्हें वृद्धावस्था में किसी भी प्रकार की आर्थिक दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
यूपी पत्रकार पेंशन योजना की आवेदन प्रक्रिया
यूपी पत्रकार पेंशन योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक पत्रकारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा या ऑफलाइन इसकी जानकारी जल्द ही उपलब्ध होगी। आवेदन प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया जायेगा ताकि कोई भी पत्रकार आसानी से आवेदन कर सके।
ऑनलाइन आवेदन: ऑनलाइन आवेदन की स्थिति मैं योजना के लिए आवेदन उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर किया जा सकेगा।
आवश्यक दस्तावेज़: आवेदन पत्र के साथ पहचान पत्र, पत्रकारिता का अनुभव प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, और बैंक खाता विवरण जैसे आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करने होंगे।
आवेदन की समीक्षा: सभी दस्तावेजों की समीक्षा होने के बाद पात्र पत्रकारों को पेंशन योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के पत्रकारों को न केवल आर्थिक मदद प्रदान करना है, बल्कि उन्हें समाज में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी करना है।
यूपी पत्रकार पेंशन योजना पत्रकारिता के क्षेत्र में एक सराहनीय पहल है, जो राज्य के वरिष्ठ पत्रकारों को उनके योगदान के लिए सम्मान और आर्थिक स्थिरता प्रदान करेगी। यदि आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो योजना के शुरू होते ही ऑनलाइन आवेदन करें और इस योजना का हिस्सा बनें।
नोट: उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी इस योजना को शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना का प्रारूप जल्द ही तैयार हो जायेगा और इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जायेगा। फ़िलहाल इसे लागू नहीं किया गया है, इस योजना के लागू होते ही आपको योजना से सम्बंधित आधिकारिक वेबसाइट तथा आवेदन करने के सभी आवश्यक लिंक और प्रक्रिया इसी आर्टिकल के माध्यम से उपलब्ध करवा दिए जायेंगे। सभी अपडेट पाने के लिए आप हमारी वेबसाइट jatbulletin.com को आज ही बुकमार्क करके रख सकते हैं।
Mukhyamantri Yuva Udyami Vikas Abhiyan Yojana एक सरकारी योजना है जिसका उद्देश्य युवाओं को स्व-रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने और राज्य के आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है। इस योजना के तहत युवाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है ताकि वे अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें और उसे सफलतापूर्वक चला सकें। इस योजना का उद्देश्य अगले 10 वर्षों में 10 लाख सूक्ष्म इकाइयां स्थापित करना है, जिससे हर साल 1 लाख शिक्षित और प्रशिक्षित युवाओं को वित्तीय सहायता मिलेगी.
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योजना का महत्व
Mukhyamantri Yuva Udyami Vikas Abhiyan Yojana का महत्व आर्थिक और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर बहुत बड़ा है। यह योजना न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करती है, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। इस योजना के माध्यम से निम्नलिखित लाभ होते हैं:
रोजगार सृजन: युवा उद्यमी अपने व्यवसाय में नए रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं, जिससे बेरोजगारी की समस्या कम हो सकती है।
ग्रामीण और शहरी विकास: योजना के तहत युवा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, जिससे इन क्षेत्रों का समग्र विकास हो सकता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम: यह योजना प्रधानमंत्री की आत्मनिर्भर भारत योजना का हिस्सा है, जो देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
योजना के लाभ
इस योजना के अंतर्गत युवाओं को निम्नलिखित प्रकार के लाभ दिए जाते हैं:
वित्तीय सहायता: योजना के अंतर्गत चयनित आवेदक व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
अनुदान: जब एक व्यक्ति पहले वाले ऋण को सफलतापूर्वक पुनर्भुगत कर देता है, तो उसे दूसरे ऋण की भी अवधारणा की जा सकती है, जिसकी राशि 7.5 लाख रुपये तक हो सकती है।
व्यवसायिक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण: युवाओं को व्यवसाय संचालन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे वे व्यवसायिक कठिनाइयों का सामना आसानी से कर सकें।
अन्य सुविधाएं: युवा उद्यमियों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रकार की जानकारी और समर्थन प्रदान किया जाता है।
पात्रता (Eligibility Criteria)
Mukhyamantri Yuva Udyami Vikas Abhiyan Yojana के तहत आवेदन करने के लिए निम्नलिखित पात्रता शर्तों का पालन करना आवश्यक है:
आयु सीमा: योजना के तहत आवेदन करने के लिए आवेदक की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
शैक्षणिक योग्यता: आवेदक को न्यूनतम 8वीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है।
निवास प्रमाण पत्र: आवेदक को उस राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए जहां यह योजना लागू है।
व्यवसाय प्रकार: आवेदक को किसी भी प्रकार का उत्पादन, सेवा, या व्यापार आधारित व्यवसाय शुरू करना होगा।
अन्य योजनाओं का लाभ नहीं लिया हो: यदि आवेदक पहले किसी अन्य सरकारी योजना के तहत उद्यम शुरू करने के लिए अनुदान या ऋण प्राप्त कर चुका है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगा।
आवेदन प्रक्रिया (How to Apply)
Mukhyamantri Yuva Udyami Vikas AbhiyanYojana के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया को बहुत सरल और सुलभ बनाया गया है। आवेदन की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है:
आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: योजना के लिए आवेदन करने के लिए संबंधित राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट (जो जल्द ही उपलब्ध होगी) पर जाना होगा। इसके अलावा, आप नजदीकी जिला उद्योग केंद्र या MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) विभाग के कार्यालय में भी जाकर आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें: ऑनलाइन फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, आयु, मोबाइल नंबर, पता, व्यवसाय से संबंधित जानकारी, और बैंक खाता विवरण भरें। ध्यान रखें कि सभी जानकारी सही और प्रमाणित होनी चाहिए।
दस्तावेज़ अपलोड करें: आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज़ जैसे:
निवास प्रमाण पत्र,
शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र,
व्यवसाय योजना,
बैंक खाता विवरण,
आधार कार्ड,
मोबाइल नंबर
पासपोर्ट साइज फोटो
अन्य कोई भी दस्तावेज जो मांगे जाएँ
फॉर्म सबमिट करें: सभी जानकारी भरने और दस्तावेज़ अपलोड करने के बाद आवेदन फॉर्म को सबमिट करना होगा। फॉर्म सबमिट करने के बाद आपको एक आवेदन संख्या मिलेगी, जिसे आप भविष्य में आवेदन की स्थिति जांचने के लिए उपयोग कर सकते हैं।
आवेदन की स्थिति जांचें: आवेदन जमा करने के बाद आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन की स्थिति देख सकते हैं। आवेदन स्वीकृत होने पर आपको संबंधित अधिकारी द्वारा संपर्क किया जाएगा और आगे की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी।
योजना के नियम और शर्तें (Terms and Conditions)
Mukhyamantri Yuva Udyami Vikas Abhiyan Yojana के तहत कुछ नियम और शर्तें लागू होती हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:
ऋण की वापसी: योजना के अंतर्गत प्राप्त ऋण को एक निश्चित समयावधि में वापस करना होता है।
अनुदान की वापसी: यदि आवेदक योजना की शर्तों का उल्लंघन करता है या व्यवसाय बंद कर देता है, तो उसे अनुदान राशि वापस करनी होगी।
ऋण का उपयोग: योजना के तहत प्राप्त ऋण का उपयोग केवल व्यवसाय संचालन के लिए किया जा सकता है, अन्य उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
बिजनेस की निगरानी: सरकार या संबंधित विभाग द्वारा आवेदक के व्यवसाय की निगरानी की जा सकती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऋण का सही उपयोग हो रहा है।
नियमित रिपोर्टिंग: लाभार्थी को अपने व्यवसाय की प्रगति के बारे में समय-समय पर संबंधित विभाग को जानकारी देनी होगी।
Mukhyamantri Yuva Udyami Vikas Abhiyan Yojana मुख्य रूप से युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए शुरू की गयी है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करना और उन्हें एक सफल उद्यमी बनने में मदद करना है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक ऋण, अनुदान और अन्य संसाधन उपलब्ध कराती है ताकि युवा आत्मनिर्भर बन सकें।
Barsana: A Spiritual and Cultural Experience (Image Credits: Banarasi Toli)
भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित और भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा से लगभग 50 किलोमीटर दूर बसा बरसाना, श्री राधारानी जिनको बृजवासी लाड़ली जी के नाम से भी सम्बोधित करते हैं की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। यह धार्मिक स्थल भगवान श्रीकृष्ण और राधा के अप्रतिम प्रेम से जुड़ा हुआ है। बरसाना, विशेष रूप से राधाष्टमी तथा होली के दौरान, रंगों और संस्कृति के जश्न का अनोखा अनुभव प्रदान करता है। यहां यात्रा करने से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि यहां की सुंदरता और लोक कला भी मन को मोह लेती है। अगर आप भी श्री लाड़ली जी के अनन्य भक्त हैं तो आपको बरसाने आकर श्रीजी का आशीर्वाद जरूर प्राप्त करना चाहिए। आइए जानते हैं कि बरसाना में आपको क्या देखना चाहिए, ठहरने के क्या स्थान हैं, यहां का प्रसिद्ध खान-पान क्या है और यहाँ से आप क्या खरीद सकते हैं।
बरसाना के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. श्रीराधारानी मंदिर, बरसाना
श्रीराधारानी मंदिर, जिसे श्रीलाडलीजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, इसे बरसाना का मुख्य आकर्षण माना जाता है। शानदार वास्तुकला और खूबसूरत नक्काशी से बना यह मंदिर राधारानी के जन्मस्थान पर स्थित है और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह मंदिर वैष्णव धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं, खासकर राधाष्टमी और होली के अवसरों पर।
राधारानी मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता अत्यधिक है क्योंकि इसे राधा रानी के निवास स्थान के रूप में जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राधा जी का जन्म यहीं हुआ था, और यह स्थान राधा और कृष्ण की प्रेम लीलाओं का केंद्र भी रहा है। बरसाना स्वयं राधारानी की भूमि मानी जाती है, और यहां की हर चीज़ राधा के साथ जुड़ी हुई मानी जाती है। मंदिर में प्रवेश के लिए एक विशाल सीढ़ीदार रास्ता है, जिसमें लगभग 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह रास्ता श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचाता है। सीढ़ियों के दोनों ओर खूबसूरत दृश्य दिखाई देते हैं, और आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों का मन मोह लेता है।
2. कीर्ति मंदिर, बरसाना
कीर्ति मंदिर बरसाने का एक खास मंदिर है जो श्री राधारानी जी की मां माता कीर्ति को समर्पित है, वैसे ब्रज में आपको राधा रानी के कई मंदिर मिल जाएंगे। लेकिन, रंगीली महल के पास कीर्ति मंदिर लोगों को कई कारणों से अपनी तरफ आकर्षित करता है। कीर्ति मंदिर दुनिया का ऐसा एकलौता मंदिर है जहां राधा रानी मां की गोद में है। मंदिर के गर्भगृह के दरवाजे के दोनों तरफ अष्ट सखियां लाडलीजी को निहारती नजर आएंगी। यहां आपको विभिन्न झांकियां भी देखने को मिलेंगी। श्री लाडलीजी को झूला झुलाते भगवान श्रीकृष्ण की झांकी बरबस ही पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। सखियों के साथ रासलीला करते राधा कृष्ण की झांकी पर्यटकों का मन मोह लेती है।
जगदगुरु कृपालु महाराज द्वारा बनवाया गए कीर्ति मंदिर की वास्तुकला अत्यधिक सुंदर और शिल्प कला का अद्भुत उदाहरण है। मंदिर की ऊंचाई और इसके निर्माण की शैली इसे दूर से ही एक भव्य रूप प्रदान करती है।
3. रंगीली गली, बरसाना
रंगीली गली बरसाना का एक प्रमुख और प्रसिद्ध स्थल है, जो राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। यह गली विशेष रूप से अपने सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के लिए जानी जाती है और बरसाना आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र है। रंगीली गली का नाम सुनते ही बरसाना की होली की परंपरा और यहां के अद्वितीय त्योहारों का चित्रण मन में उभर आता है।
इस गली में हर साल होली के समय विशेष रूप से उत्सव का माहौल रहता है। लट्ठमार होली यहां की सबसे प्रसिद्ध परंपरा है, जो विशेष रूप से रंगीली गली में मनाई जाती है। बरसाना की इस होली में पुरुष नंदगांव से आते हैं, जिन्हें गोप कहा जाता है, और वे रंगीली गली में राधा रानी की गली में प्रवेश करते हैं। इसके बाद, बरसाना की महिलाएं, जिन्हें गोपियों के रूप में माना जाता है, इन पुरुषों पर लाठियों से वार करती हैं, जबकि पुरुष खुद को ढालों से बचाते हैं। यह लीलामय होली राधा और कृष्ण की नोकझोंक और प्रेम की अभिव्यक्ति है। यह दृश्य देखने लायक होता है और लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इसे देखने आते हैं।
4. मान मंदिर, बरसाना
मान मंदिर, बरसाना के चार प्रमुख पहाड़ी मंदिरों में से एक है, जो अपने धार्मिक और पौराणिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि से जुड़ा हुआ है और राधा-कृष्ण की नोकझोंक और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। बरसाना, जो राधारानी का जन्मस्थान है, यहां की धार्मिक परंपराओं और उत्सवों के लिए प्रसिद्ध है, और मान मंदिर यहां के प्रमुख आकर्षणों में से एक है।
मान मंदिर का धार्मिक महत्त्व राधा और कृष्ण की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार, एक दिन राधारानी श्रीकृष्ण से नाराज होकर इस पहाड़ी पर आ गईं और कृष्ण से दूर होकर यहाँ आकर बैठ गईं। भगवान श्रीकृष्ण राधा को मनाने के लिए यहां आए, और तब से यह स्थान ‘मान मंदिर’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मान मंदिर की वास्तुकला अत्यधिक सुंदर और साधारण है, लेकिन इसका वातावरण बहुत ही शांत और दिव्य होता है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहां से पूरे बरसाना का अद्भुत दृश्य देखा जा सकता है।
5. प्रेम सरोवर, बरसाना
लाडलीजी के अश्रुओं से बना यह पवित्र सरोवर अत्यंत शांत और सौम्य है, इसको लेकर कई धारणाएं प्रचलित हैं, पर निश्चित ही यहाँ आकर हर भक्त को आंतरिक शांति मिलती है। प्रेम सरोवर के चारों ओर हरी-भरी वनस्पति और पानी में गिरते पेड़ों का प्रतिबिंब इसे एक जादुई अनुभव बनाते हैं। यह स्थल विशेष रूप से राधा-कृष्ण के भक्तों के लिए एक आस्था का प्रतीक है, जहां वे भगवान की लीलाओं को स्मरण करते हैं और अपने जीवन में प्रेम, भक्ति और समर्पण का अनुभव करते हैं।
6. मोहन सरोवर, बरसाना
मोहन सरोवर का धार्मिक महत्त्व राधा और कृष्ण की पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। यह पवित्र सरोवर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कई लीलाओं को साक्षी रहा है। यह सरोवर भगवान कृष्ण के नाम पर बना है, जिन्हें प्रेम और भक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। मोहन सरोवर के आसपास की मान्यता है कि राधा और कृष्ण की दिव्य लीलाओं के दौरान, यह स्थान विश्राम और ध्यान का केंद्र रहा है। यह स्थल विशेष रूप से राधा-कृष्ण के भक्तों के लिए एक आस्था का प्रतीक है, जहां वे भगवान की लीलाओं को स्मरण करते हैं और अपने जीवन में प्रेम, भक्ति और समर्पण का अनुभव करते हैं।
बरसाने के प्रमुख स्थानीय त्यौहार
वैसे तो बृजमण्डल मैं समस्त हिन्दू त्योहारों को धूमधाम से मानाने की परंपरा रही है पर जब बात बरसाने की आती है तो, यहाँ के स्थानीय लोग राधाष्टमी और होली को पूरे मनोयोग से मनाते हैं
1. राधाष्टमी उत्सव
राधारानी मंदिर में राधाष्टमी का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह राधा रानी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है और इस दिन यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं। मंदिर में विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है, और भव्य झांकियां सजाई जाती हैं।
2. होली का उत्सव
बरसाना की होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है, जिसे “लट्ठमार होली” के नाम से जाना जाता है। होली के समय यहां राधारानी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ होती है। यह त्योहार राधा और कृष्ण की लीला को समर्पित होता है, और यहां की होली की परंपरा बेहद अद्वितीय और रंग-बिरंगी होती है।
मथुरा-वृंदावन से खरीदने योग्य वस्तुएं
मथुरा और वृंदावन, भगवान कृष्ण की जन्मभूमि और बाल्यकाल की लीला स्थली, अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां की कुछ विशेष वस्तुएं हैं, जिन्हें आप खरीद सकते हैं:
1. राधा-कृष्ण की मूर्तियाँ:
मथुरा और वृंदावन में भगवान कृष्ण की विविध प्रकार की मूर्तियाँ मिलती हैं। आप लकड़ी, पत्थर या धातु की बनी मूर्तियाँ खरीद सकते हैं। ये मूर्तियाँ घर की पूजा के लिए विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।
2. पेंटिंग और चित्र
मथुरा और वृंदावन की कला में लघु चित्रण का बड़ा महत्व है। यहां के कलाकारों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स, विशेष रूप से राधा-कृष्ण की लीलाओं पर आधारित, बहुत सुंदर होती हैं। ये कला के प्रेमियों के लिए बेहतरीन उपहार हो सकती हैं।
3. ठाकुरजी की पोशाक एवं श्रृंगार
पूरे बृजमण्डल मैं आपको ठाकुरजी (भगवान श्रीकृष्ण) की और राधारानी की खूबसूरत और मनोहारी पोशाकें तथा उनके श्रृंगार के लिए एक से बढ़कर एक वस्तुएं मिल जाएँगी, जिन्हे सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक से शृद्धालु बड़े ही प्रेमपूर्वक ले जाते हैं।
4. कंठी-माला और पूजा सामग्री
बृजमण्डल मैं आपको कंठी-माला और पूजा सामग्री भी हर जगह मिल जाएगी। यहाँ की तुलसी माला तो वैष्णवजनों मैं अत्यंत लोकप्रिय है, साथ ही पूजा के लिए विशेष सामग्री भी बृज मैं आने वाले लाखों भक्तजन बड़े चाव से खरीदकर ले जाते हैं।
बरसाने के मुख्य स्थानीय व्यंजन?
अब बृजमण्डल की बात हो और खानपान पर चर्चा न की जाये, ये तो असंभव हैं क्योंकि बृज के लोग खानपान के बड़े प्रेमी माने जाते हैं और उस पर भी मिठाइएं के लिए तो हर बृजवासी आपको दीवाना मिलेगा। बरसाना की यात्रा के दौरान यहां के पारंपरिक व्यंजन और मिठाइयाँ ज़रूर चखनी चाहिए। वैसे तो आपको खाने के लिए पारम्परिक नार्थ इंडियन और साउथ इंडियन भोजन बहुतायत मैं उपलब्ध है, पर जब यहां के स्थानीय भोजन की बात की जाती है तो आप निम्न व्यंजन का स्वाद लेना न भूलें
1. देसी घी के लड्डू
बरसाना के राधा रानीमंदिर के प्रसाद के रूप में मिलने वाले लड्डू बहुत प्रसिद्ध हैं। इन लड्डुओं का स्वाद बेहद खास होता है और यह यहां की एक विशिष्ट मिठाई है।
2. जलेबी, कचौड़ी और आलू का झोल (सब्जी)
यह बृज का प्रमुख नाश्ता है जिसके बिना बृजवासी दिन की शुरुवात की कल्पना भी नहीं करना चाहेंगे, यह बरसाने और पूरे बृजमण्डल मैं आपको स्थानीय दुकानों और खाने की जगहों पर बड़ी ही आसानी से मिलता है। गरमागरम कचौड़ी के साथ आलू का झोल (सब्जी) और साथ मैं गरम जलेबी की मिठास का स्वाद आपको हमेशा याद रहेगा।
3. दही की मीठी लस्सी
जलेबी, कचौड़ी के साथ अगर दही की ठंडी और मीठी लस्सी और पी ली जाये तो मानो सोने पर सुहागा। लस्सी खासतौर पर गर्मियों के दौरान बहुत पसंद की जाती है। यहाँ की मोटी मलाई वाली लस्सी का स्वाद आपको बरसाना और बृजमण्डल की यात्रा के दौरान एक अलग ताजगी का अनुभव देगा।
4. मक्खन और मिश्री
राधा और कृष्ण के प्रतीक के रूप में मक्खन और मिश्री का सेवन यहां की धार्मिक यात्रा का एक हिस्सा है। कई मंदिरों के पास यह आपको आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
5. मथुरा के पेड़े
बृज मैं आये और पेड़े नहीं खाये तो क्या ही खाया, वैसे तो बृज मैं इतने प्रकार की मिठाइयां मिलती हैं की आप सोच भी नहीं सकते पर इनमे सबसे प्रमुख हैं, मथुरा के पेड़े जो देश ही नहीं विदेशों तक मशहूर हैं और इनका स्वाद आपको इन्हे भूलने नहीं देगा। तो जब भी बृजमण्डल मैं आएं तो यहाँ के पेड़े खाना न भूलें।
यात्रा का सर्वश्रेष्ठ समय
बरसाना की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय होली का होता है जो मार्च मैं आती है, जब यहां चहुंओर होली की धूम रहती हैं और विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली होती है। यह होली का त्योहार न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर में एक अलग पहचान रखता है। इसके अलावा राधाष्टमी के साथ ही अक्टूबर से मार्च के बीच का समय भी अच्छा माना जाता है, पर इस समय आते समय गर्म कपडे लाना न भूलें क्योंकि इस दौरान मौसम अत्यधिक ठंडा रहता है।
कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग: बरसाना के निकटतम हवाई अड्डा दिल्ली (इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) है, जो लगभग 150 किलोमीटर दूर है। वहां से आप टैक्सी या बस के माध्यम से बरसाना पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है, जो लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मथुरा से आप टैक्सी या बस लेकर आसानी से बरसाना पहुँच सकते हैं।
सड़क मार्ग: मथुरा और दिल्ली से बरसाना के लिए नियमित बसें और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। निजी वाहन से भी आप आराम से यहां पहुँच सकते हैं।
ठहरने के उत्तम स्थान
बरसाना में कई धर्मशालाएं, गेस्ट हाउस और होटल उपलब्ध हैं, जो आपके बजट और सुविधा के अनुसार विकल्प प्रदान करते हैं। साथ ही आस-पास स्थित मथुरा और वृंदावन में भी अच्छे होटल्स मिल जाते हैं। यहां पर आपको लक्ज़री से लेकर बजट होटल्स तक कई विकल्प मिलेंगे।
ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
स्थानीय संस्कृति का सम्मान करें: धार्मिक नगरी होने के कारन यहाँ के लोग रीति-रिवाजों के प्रति बहुत आस्थावान हैं। इसलिए स्थानीय संस्कृति का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण की सुरक्षा: यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के लिए पर्यावरण का ध्यान रखें। प्लास्टिक का उपयोग न करें और कचरा सही स्थान पर फेंकें।
धैर्य रखें: धार्मिक स्थलों पर भीड़ हो सकती है। धैर्य बनाए रखें और सब कुछ आराम से करें।
स्थानीय लोगों के साथ संवाद करें: उनकी मदद से आप बरसाना के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के बारे में जान सकते हैं।
उचित वस्त्र पहनें: धार्मिक स्थलों पर जाने के दौरान आपको साधारण और पारंपरिक वस्त्र पहनने चाहिए। महिलाओं को साड़ी या सलवार-कुर्ता पहनना उचित होता है, जबकि पुरुषों को कुर्ता या टी-शर्ट और पैंट पहनना चाहिए।
बरसाना यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुभव है, बल्कि यह आपको उत्तर प्रदेश की पारंपरिक संस्कृति, बृजमंडल के स्वादिष्ट भोजन और ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराती है। यहां की यात्रा करने पर आप भारतीय धर्म और कृष्ण भक्ति के एक अनोखे अनुभव को महसूस करेंगे। ये यात्रा आपको न सिर्फ भौतिक वरन आत्मिक रूप से भी अध्यात्म से ओतप्रोत कर देगी, जो आपके जीवन मैं यकीनन एक यात्रा एक समृद्ध और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगी।
ब्रज की अधिष्ठात्री देवी व लीलाधर श्रीकृष्ण की आध्यात्मिक शक्ति श्रीराधारानी जी का प्राक्टोत्सव ‘राधाष्टमी’ आज यानी बुधवार, 11 सितंबर को मनाई जा रही है। आज समूचा बृज क्षेत्र ‘राधा राधा’ नाम से गुंजायमान है, यहाँ लाखों की संख्या मैं भक्तगण पहुँच चुके हैं और हर कोई राधा रानी के दर्शन को बेताब नजर आ रहा है।
जगह जगह भंडारे व लोक गायन का प्रबंध
श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न समाजसेवी संगठनों द्वारा भंडारों का आयोजन किया जा रहा है। जिससे बृज क्षेत्र मैं आने वाले समस्त श्रद्धालुगण राधाष्टमी के इस पवन अवसर पर प्रसाद से वंचित न रह जाएँ। साथ ही यहाँ सांस्कृतिक काय्रक्रमों के साथ भजन गायन, लोक गायन एवं रसिया गायन आदि की भी व्यवथा की गयी है, जिससे भक्तगण राधाकृष्ण की लीलाओं का मंचन भी देख पा रहे हैं।
झालरों एवं रंगबिरंगी लाइटों से सजाया गया बरसाना
पूरा बरसाना झालरों एवं रंगबिरंगी लाइटों से सजाया गया है, इसके साथ ही बृज क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों को सजाने का जिम्मेदारी मंदिर प्रबंधन को दी गयी है। सजने वाले मंदिरों में बरसाना के साथ-साथ मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, दाऊजी, गोवर्धन, महावन, छटीकरा एवं मार्ग के अन्य मंदिर भी शामिल हैं। साथ ही छोटे बड़े सामाजिक समूहों ने भी अपने अपने स्तर पर अपने आसपास के मंदिरों को सजाया है।
बनाये गए हैं सेफी पॉइंट
साथ ही बरसाने व आसपास के क्षेत्रों मैं विभिन्न जगह सेल्फी पॉइंट की व्यवस्था भी की गयी है जिससे आने वाले श्रद्धालुगण इस खास मौके पर अपनी फोटो खींचकर अपनी यात्रा को यादगार बना सकें।
ट्रैफिक की है उचित व्यवस्था
बृज मंडल मैं आने वाले सभी श्रद्धालुओं के साथ ही आम जनमानस को समस्या न हो इसके लिए ट्रैफिक को जगह जगह रोकने और डाइवर्ट करने का पूरा प्रबंध प्रशासन ने किया है, जिससे भक्तजन बिना किसी व्यवधान के राधाष्टमी का पूरा आनंद उठा पाएं।
इस दिन भक्त राधाष्टमी का व्रत रखते हैं और श्रीराधा कृष्ण की पूजा अर्चना कर जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। राधा अष्टमी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें। अब एक लकड़ी की चौकी लें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएं, अब राधा रानी की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद जल से स्नान कराएं और प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें। अब धूप और दीपक जलाकर राधा रानी को फूल, फल, चंदन और वस्त्र अर्पित करें। फिर राधा रानी का श्रृंगार करें। राधा रानी के साथ साथ भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा अर्चना करें, पूजा के दौरान राधा रानी के मंत्र जाप या उनके स्तोत्र का पाठ करें। पूजा का समापन श्री राधा जी और भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण को भोग अर्पित करें। इसके बाद सभी को प्रसाद बांटे और स्वयं भी ग्रहण करें।
जॉब डेस्क, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यूपीपीएससी, प्रयागराज में सहायक रजिस्ट्रार रिक्ति 2024 की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र आमंत्रित किया जाता है। सभी पात्रता मानदंड पूरा करने वाले इच्छुक उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन पत्र आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने से पहले कृपया पूर्ण अधिसूचना पढ़ें।
महत्वपूर्ण सूचना:
1. ऑनलाइन आवेदन से पूर्व आवेदकों को OTR पंजीकरण कर OTR नंबर प्राप्त करना अनिवार्य है। 2. जिन आवेदकों ने OTR नंबर प्राप्त नहीं किया है, वो ऑनलाइन आवेदन से 72 घंटे पूर्व विभाग की वेबसाइट से OTR नंबर प्राप्त कर सकते हैं। 3. OTR नंबर प्राप्त करने के बाद ही आवेदक अपना आवेदन विभाग की वेबसाइट पर सबमिट कर सकता है।
पदकाविवरण:
पद का नाम:Assistant Registrar
कुल पदों की संख्या: 38 Nos.
विज्ञापन संख्या: Advt. No. A-5/E-1/2024
वेतनमान:रु. 9300/- से रु. 34800/- (लेवल-8)
महत्वपूर्ण तिथियाँ:
ऑनलाइन आवेदन/ शुल्क जमा प्रारंभ तिथि:
28-08-2024
ऑनलाइन आवेदन/ शुल्क जमा/ की अंतिम तिथि:
28-09-2024
ऑनलाइन सुधार करने की अंतिम तिथि:
05-10-2024
परीक्षा की तारीख
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आयु सीमा :
न्यूनतम आयु: 30 वर्ष
अधिकतम आयु: 45 वर्ष
आरक्षित श्रेणियों के लिए आयु सीमा में छूट नियमों के अनुसार दी जाएगी।
आवेदनप्रक्रिया:
आवेदन का प्रकार:
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SC / ST
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रिक्तियों का विवरण
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पद की पात्रता
Assistant Registrar
38
Bachelor Degree in Any Stream in Any Recognized University in India. 07 Year Experience. For more details, read the notification carefully.
चयनप्रक्रिया:
लिखितपरीक्षा:
चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा शामिल होगी। परीक्षा का पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा।
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