देश मैं कम होने का नाम ही ले रहा है रेल हादसा (Rail Accident), जा रही है जानें और दहशत मैं हैं यात्री।
हावड़ा से मुंबई जा रही रेल संख्या 12810 हावड़ा-मुंबई मेल मंगलवार सुबह एक हादसे का शिकार हो गयी, इस हादसे में 2 यात्रियों की मौत और 150 लोग घायल होने कि खबर आ रही है। यह एक्सप्रेस ट्रेन झारखंड में चक्रधरपुर डिवीजन के बड़ाबम्बो-राजखरसावां रेलवे स्टेशन के बीच से गुजर रही थी, तभी पोटोबेड़ा गांव के पास इसके डिब्बे पटरी से उतर गए। अचानक हुए इस हादसे से ट्रेन मैं चीख पुकार मच गई, ट्रेन के अंदर ऊपर की बर्थ पर गहरी नींद में सो रहे कई लोग अचानक बेहद तेज झटके से नीचे गिर गए।
रेलवे के पोल नंबर 219 के पास आई जोरदार आवाज से कई यात्री सहम से गए और ट्रेन के अंदर अफरातफरी मच गई। जब लोगों को कुछ समझ आता तब तक ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर चुके थे। गिनने पर पता चला कि हावड़ा-मुंबई मेल के 18 कोच पटरी से उतर गए हैं। ट्रेन की सिर्फ चार बोगियां ही पटरी पर सही सलामत खड़ी थी। कहा जा रहा है कि यहीं पर दो दिन पहले एक मालगाड़ी डिरेल हुई थी, जिसके वैगन ट्रैक पर ही थे। वहीं, हावड़ा-मुंबई मेल दूसरे ट्रैक से आ रही थी और पहले से ट्रैक पर पड़े डिब्बों से टकरा कई।
रेलवे की ओर से हावड़ा-मुम्बई रेलवे लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी गई है। मौके पर राहत और बचाव का कार्य जारी है। घायल यात्रियों को रांची के रिम्स हॉस्पिटल और चक्रधरपुर के आसपास के सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है।
देश में एक के बाद एक होते रेल हादसे ने सभी को हैरान कर के रख दिया है। जिन लोगों ने आने जाने के लिए एडवांस बुकिंग करवा रखी हैं उनमे दहशत है कि कहीं अगला रेल हादसा उनके साथ ना हो जाये।
राष्ट्रपति कार्यालय से जारी की गयी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने शनिवार 28 जुलाई को राजस्थान, तेलंगाना, सिक्किम, झारखंड, छत्तीसगढ़, मेघालय, महाराष्ट्र, पंजाब, असम, और के लिए राज्यपालों की नियुक्ति की।
राष्ट्रपति ने पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश, चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में श्री बनवारीलाल पुरोहित का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
कौन बना कहाँ का राज्यपाल
हरिभाऊ किसनराव बागड़े को राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
जिष्णु देव वर्मा को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
संतोष कुमार गंगवार को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
रामेन डेका को छत्तीसगढ़ का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
सी एच विजयशंकर को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
श्री सी.पी. राधाकृष्णन को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया, साथ ही तेलंगाना के अतिरिक्त प्रभार भी मिला। इससे पहले राधाकृष्णन झारखंड के राज्यपाल थे।
गुलाब चंद कटारिया को पंजाब का राज्यपाल नियुक्त किया गया है तथा उन्हें संघ शासित प्रदेश, चंडीगढ़ का प्रशासक भी नियुक्त किया गया है। इससे पहले कटारिया असम के राज्यपाल थे।
लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को असम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है तथा उन्हें मणिपुर के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इससे पहले आचार्य सिक्किम के राज्यपाल थे।
इसके साथ ही राष्ट्रपति ने के. कैलाशनाथन की पुडुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में नियुक्ति की है, जो उनके कार्यभार संभालने की तिथि से प्रभावी होगी।
राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के लिए योग्यताएँ
अनुच्छेद 157 और 158 राज्यपाल की योग्यताएँ और उसके कार्यालय की शर्तें निर्धारित करते हैं। राज्यपाल को भारत का नागरिक होना चाहिए और 35 वर्ष की आयु पूरी कर लेनी चाहिए। राज्यपाल को संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं होना चाहिए, और लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं करना चाहिए।
राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच का सम्बन्ध
राज्यपाल के पद की परिकल्पना एक अराजनीतिक प्रमुख के रूप में की गई है जिसे राज्य के मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना चाहिए। अनुच्छेद 163 में कहा गया है: “राज्यपाल को उसके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद होगी, सिवाय इसके कि जब तक वह इस संविधान के तहत या इसके तहत अपने कार्यों का निष्पादन करने के लिए आवश्यक है या उनमें से कोई भी अपने विवेक पर निर्भर करता है।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज 25वें कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) के अवसर पर लद्दाख में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वह श्रद्धांजली समारोह में भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने गौरव गाथा: एनसीओ द्वारा कारगिल युद्ध पर ब्रीफिंग सुनी और अमर संस्मरण: हट ऑफ रिमेंबरेंस का दौरा किया। उन्होंने वीरभूमि का भी दौरा किया।
श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लद्दाख की गौरवशाली भूमि कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ की साक्षी है। पीएम मोदी ने कहा, “कारगिल विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि देश के लिए दिया गया बलिदान अमर होता है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही महीने, साल, दशक और सदियां बीत जाएं, देश की सीमाओं की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। पीएम मोदी ने कहा, “देश हमारे सशस्त्र बलों के शक्तिशाली महानायकों का सदैव ऋणी और अत्यंत आभारी है।”
पीएम ने कारगिल युद्ध के दिनों को याद करते हुए कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि उस समय सैनिकों के बीच थे। उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी याद है कि कैसे हमारे सैनिकों ने इतनी ऊंचाई पर एक कठिन ऑपरेशन को अंजाम दिया था। पीएम मोदी ने कहा, “मैं देश के उन वीर सपूतों को सलाम करता हूं जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। कारगिल में हमने न केवल युद्ध जीता, बल्कि हमने ‘सच्चाई, संयम और ताकत’ का एक अविश्वसनीय उदाहरण भी पेश किया।” प्रधानमंत्री ने उस समय पाकिस्तान के धोखे पर प्रकाश डाला जब भारत शांति बनाए रखने के लिए सभी प्रयास कर रहा था। उन्होंने कहा कि सच्चाई से झूठ और आतंक को घुटनों पर ला दिया गया।
आतंकवाद की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को अतीत में हमेशा हार का सामना करना पड़ा है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि पाकिस्तान ने अपने अतीत से कुछ नहीं सीखा है और प्रासंगिक बने रहने के लिए आतंकवाद और छद्म युद्ध की आड़ में युद्ध जारी रखा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आतंकवादियों के नापाक इरादे कभी पूरे नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि हमारे बहादुर जवान सभी आतंकी प्रयासों को रौंद देंगे।
अग्निपथ योजना के पीछे पेंशन का बोझ बचाने की मंशा को मुख्य कारण बताए जाने वाले दुष्प्रचार को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भर्ती होने वाले सैनिकों की पेंशन का बोझ 30 साल बाद आएगा, इसलिए इस योजना के पीछे का कारण यह नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, “हमने सशस्त्र बलों के लिए गए इस फैसले का सम्मान किया है क्योंकि हमारे लिए देश की सुरक्षा राजनीति से ज्यादा महत्वपूर्ण है।”
कारगिल विजय दिवस पर अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ”करगिल की जीत किसी सरकार या किसी पार्टी की जीत नहीं थी। ये जीत देश की है, ये जीत हमारी विरासत है। यह देश के गौरव और स्वाभिमान का त्योहार है।” उन्होंने पूरे देश की ओर से वीर जवानों को सलाम किया और करगिल विजय के 25 साल पूरे होने पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने आज वर्चुअल तरीके से लद्दाख में शिंकुन ला टनल प्रोजेक्ट का पहला विस्फोट भी देखा। लेह को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए शिंकुन ला सुरंग परियोजना में निमू – पदुम – दारचा रोड पर लगभग 15,800 फीट की ऊंचाई पर 4.1 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग का निर्माण किया जाना है। प्रधानमंत्री ने लद्दाख के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह सुरंग उनके जीवन को और आसान बनाएगी क्योंकि क्षेत्र में खराब मौसम के कारण उनके सामने आने वाली कई कठिनाइयां कम हो जाएंगी।
On 25th Kargil Vijay Diwas, the nation honours the gallant efforts and sacrifices of our Armed Forces. We stand eternally grateful for their unwavering service.https://t.co/xwYtWB5rCV
कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) की 25वी वर्षगांठ के अवसर पर 26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह लगभग 9:20 बजे द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक का दौरा करेंगे। वे करगिल युद्ध के दौरान प्राणों की आहुति देने वाले वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
इस मौके पर प्रधानमंत्री वर्चुअल रूप से शिंकुन ला सुरंग परियोजना का पहला विस्फोट भी करेंगे। बताते चलें कि शिंकुन ला सुरंग परियोजना में 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग शामिल है, जिसका निर्माण निमू-पदुम-दारचा रोड पर लगभग 15,800 फीट की ऊंचाई पर किया जाएगा, ताकि लेह को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान की जा सके।
निर्माण कार्य पूरा होने पर यह विश्व की सर्वाधिक ऊंची सुरंग होगी। शिंकुन ला सुरंग न केवल हमारे सशस्त्र बलों और उपकरणों की तीव्र और कुशल आवाजाही सुनिश्चित करेगी, बल्कि लद्दाख में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा देगी।
इस बाबत उपराज्यपाल कार्यालय, लद्दाख ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट भी साझा किया जिसमे उन्होंने लिखा “माननीय उपराज्यपाल ब्रिगेडियर (डॉ.) बीडी मिश्रा ने द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक पर भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की यात्रा की तैयारियों का जायजा लिया।”
The Hon’ble Lt Governor Brig (Dr) BD Mishra took stock of the arrangements for the visit of the Hon'ble Prime Minister of India, Shri Narendra Modi at Kargil War Memorial in Drass. pic.twitter.com/WRKubhzaL2
— Office of the Lt. Governor, Ladakh (@lg_ladakh) July 24, 2024
नई एनडीए सरकार द्वारा प्रस्तुत पहले केंद्रीय बजट (Union Budget 2024) और अपने सातवें बजट भाषण मैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई उपायों की घोषणाएं की।
एमएसएमई (MSME) के लिए की गयी मुख्य घोषणाएं
1. कोलेट्रल या तीसरे पक्ष की गारंटी के प्रावधान के बिना मशीनरी के लिए सावधि ऋण की सुविधा के लिए एक क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की जाएगी। एक अलग से गठित स्व-वित्तपोषण गारंटी फंड रुपये तक का गारंटी कवर प्रदान करेगा। प्रत्येक उधारकर्ता के लिए 100 करोड़ तक का प्रावधान रहेगा, जबकि ऋण राशि अधिक भी हो सकती है।
2. बजट एक नए तंत्र के माध्यम से, उद्योगों को तनाव की अवधि के दौरान को ऋण सहायता प्रदान करेगा जिससे ऐसे उद्यमों को उन कारणों से एनपीए चरण में जाने से रोका जा सके जो उनके नियंत्रण से परे हैं।
3. मुद्रा ऋण की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये किया जायेगा पर उन लोगों के लिए होगा जिन्होंने पहले तरुण श्रेणी के तहत लिया गया ऋण सफलतापूर्वक चुकाया है।
4. अधिक ऋण की अनुमति देने के लिए एमएसएमई समूहों में 24 नई सिडबी शाखाएं भी तीन साल के भीतर खोली जाएंगी, साथ ही कवरेज को 168 समूहों तक विस्तारित किया जाएगा।
5. एमएसएमई और पारंपरिक कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहुंच बनाने में सक्षम बनाने के लिए ई-कॉमर्स निर्यात केंद्र एक सहज नियामक ढांचे के साथ पीपीपी मोड (PPD Mode) में स्थापित किए जाएंगे, ताकि एक छत के नीचे व्यापार की सुविधा मिल सके।
6. सरकार TReDs प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य ऑनबोर्डिंग के लिए एमएसएमई खरीदारों की टर्नओवर सीमा को 500 करोड़ रुपये से घटाकर 250 करोड़ रुपये करेगी। बताते चलें कि TReDS एमएसएमई की मदद के लिए एक ऑनलाइन मंच है
7. बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा एमएसएमई ऋण के लिए एक नए मूल्यांकन मॉडल का भी प्रस्ताव है जो बाहरी मूल्यांकन पर निर्भर नहीं होगा। यह केवल पारंपरिक रूप से उपयोग की जाने वाली संपत्ति और टर्नओवर मानदंडों के बजाय अर्थव्यवस्था में एमएसएमई के डिजिटल फूटप्रिंट्स पर आधारित होगा।
उम्मीद है कि इन प्रावधानों से एमएसएमई को काफी सहायता मिलेगी और वो देश के विकास मैं अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कर देश कि जीडीपी को आगे बढ़ाने मैं सहायक बनेंगे साथ ही इससे आने वाले समय मैं रोजगार के विभिन्न अवसर उत्पन्न होंगे
देश की संसद (Parliament) मैं आज से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले आज प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए ये बात कही।
एजेंसी, नई दिल्ली। आज मीडिया को सम्बोधित करते हुए सबसे पहले प्रधानमंत्री ने इस तथ्य पर गर्व व्यक्त किया कि 60 वर्ष के अंतराल के बाद कोई सरकार लगातार तीसरी बार आई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि तीसरी बार सत्ता में आई सरकार द्वारा बजट पेश करने के कार्य को देश एक गौरवशाली घटना के रूप में देख रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बजट अमृत काल के मील के पत्थर का बजट है और सरकार एक निर्धारित अवधि में दी गई गारंटियों को वास्तविक रूप से साकार करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बजट मौजूदा सरकार के अगले पांच वर्षों की दिशा निर्धारित करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने की मजबूत नींव रखेगा।”
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले लगातार तीन वर्षों में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला देश है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण, निवेश और कार्य प्रदर्शन के कारण आज देश में उपलब्ध अवसर चरम पर हैं।
यह देखते हुए कि अब राजनीतिक दलों के बीच सभी लड़ाइयां लड़ी जा चुकी हैं और नागरिकों ने लोकसभा चुनाव के समापन के बाद सरकार चुनी है, प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से एक साथ आकर अगले 5 वर्षों के दौरान देश के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपने संगठनों से ऊपर उठने और अगले साढ़े चार वर्षों के लिए संसद के गरिमामय मंच का उपयोग करके राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जनवरी 2029 में चुनाव की रणभूमि में अवश्य जाएं पर तब तक आपकी एकमात्र प्राथमिकता देश, इसके गरीब, किसान, महिलाएं और युवा होने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में विकसित भारत के सपनों और संकल्पों को साकार करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर दु:ख व्यक्त किया कि कुछ राजनीतिक दलों के नकारात्मक दृष्टिकोण के कारण कई सांसदों को अपने विचार और अपने निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों को सामने रखने का कोई अवसर नहीं मिला है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध किया कि वे सभी सदस्यों, खासकर पहली बार चुनकर आए सदस्यों को अपने विचार रखने का अवसर दें। श्री मोदी ने लोगों को निर्वाचित सरकार और संसद में प्रधानमंत्री के भाषण पर अंकुश लगाने के बारे में याद दिलाया। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं में इसका कोई स्थान नहीं है।
प्रधानमंत्री ने सांसदों को स्मरण कराया कि देश की जनता ने राजनीतिक दलों के एजेंडों के लिए नहीं बल्कि देश की सेवा के लिए अपना जनादेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सदन राजनीतिक दलों के लिए नहीं है, बल्कि यह सदन देश के लिए है। यह सांसदों की नहीं, बल्कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों की सेवा के लिए है। अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने यह विश्वास व्यक्त किया कि सभी संसद सदस्य सार्थक चर्चा में अपना योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि देश को सकारात्मक विचारों की आवश्यकता है ताकि इसे आगे ले जाया जा सके। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले विचार बुरे नहीं होते, बल्कि नकारात्मक विचार ही विकास में बाधा डालते हैं। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर का उपयोग आम नागरिकों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
इस बाबत उन्होंने एक पोस्ट भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया।
Sharing my thoughts at the start of the Budget Session of Parliament.https://t.co/doTLz9NDeD
केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कल इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2024 की थीम ‘भविष्य अभी है’ (The Future is Now) का अनावरण किया। यह विषय इस उपलब्धि को दर्शाता है कि भारत तकनीकी विकास का केंद्र बना हुआ है और आईएमसी 2024 आज की हमारी दुनिया को बदलने वाली तकनीकों को सहयोग और सक्रिय रूप से आकार देने के लिए वैश्विक प्रमुखों- दूरदर्शी व्यक्तित्वों, अग्रदूतों और नवप्रवर्तकों को एक मंच पर ला रहा है, जहां यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य केवल एक संकल्पना नहीं है अपितु यह वर्तमान में अवसर प्रदान कर रहा है।
इस अवसर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारतीय मोबाइल कांग्रेस 2024 एप्लीकेशन और वेबसाइट का भी शुभारंभ किया। यह पंजीकरण के लिए एक शानदार संवादात्मक ऐप है। केंद्रीय मंत्री के प्रथम पंजीकरण और मुख्य संबोधन के साथ, भारतीय मोबाइल सम्मेलन ने प्रतिनिधियों, आगंतुकों, शिक्षाविदों/कॉलेजों, सरकार और मीडिया के लिए भी पंजीकरण खोलने की घोषणा कर दी है।
इस अवसर पर, संचार मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक तब सबसे अच्छी होती है जब यह लोगों को एक साथ लाती है। हमारे देश भारत से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता के अनुरूप देश भर में संचार समरूपता लाते हुए इस विभाजन को दूर करने में तकनीक की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक और संचार के माध्यम से अवसरों का एक मंच प्रदान किया जा सकेगा। संचार और नेटवर्क के माध्यम से भारत के पहले गांव से लेकर भारत के प्रमुख गांवों के लोगों को एक साथ लाया जाएगा।
संचार मंत्री ने आईएमसी को वैश्विक मिलन स्थल की संज्ञा देते हुए आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में भारत इस तरह के आयोजनों का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि ‘भविष्य अभी है’ थीम हमारी क्षमताओं, हमारी उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं दोनों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने पिछले 10 वर्षों में दूरसंचार क्षेत्र में हुए क्रांतिकारी परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता से अब प्रौद्योगिकी का आपूर्तिकर्ता बन गया है। उन्होंने दूरसंचार अधिनियम 2023, पीएलआई योजना, सबसे त्वरित 5जी रोलआउट जैसी विभिन्न दूरसंचार पहलों की सराहना करते हुए प्रतिबद्धता जताई कि दूरसंचार अधिनियम 2023 के नियमों को अगले 180 दिनों के भीतर अधिसूचित किया जाएगा।
आईएमसी-2024, डब्ल्यूटीएसए-2024 और जीएसएस-2024: दूरसंचार विभाग (डीओटी) और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एशिया की प्रमुख डिजिटल प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी, इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) का आठवां संस्करण इस वर्ष 15 अक्टूबर से नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित किया जाएगा। आईएमसी 2024 के साथ-साथ, भारत 14-24 अक्टूबर, 2024 तक इसी स्थल पर प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों- विश्व दूरसंचार मानकीकरण सभा नई दिल्ली 2024 (डब्ल्यूटीएसए 2024) और वैश्विक मानक संगोष्ठी (जीएसएस 2024) की भी मेजबानी कर रहा है।
स्टार्ट-अप और एमएसई के लिए परीक्षण और प्रतिपूर्ति योजना: दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने दूरसंचार क्षेत्र में स्टार्टअप और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए वित्तीय बोझ को कम करने के उद्देश्य से एक प्रतिपूर्ति योजना का शुभारंभ किया है। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और निर्यात बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई यह योजना उत्पाद की गुणवत्ता और बाज़ार पहुँच के लिए आवश्यक परीक्षण और प्रमाणन लागतों के लिए प्रत्येक स्टार्टअप या एमएसई को 50 लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति करेगी। 25 करोड़ रुपये के कुल वित्तपोषण आवंटन के साथ, आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जिससे प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सकेगा और प्रस्तुतियों का कुशल संचालन सुनिश्चित होगा। स्टार्टअप को 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, सूक्ष्म उद्यमों को 60 प्रतिशत और छोटे उद्यमों को 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी, जो दूरसंचार उद्योग में विकास और नवाचार के लिए समान समर्थन के लिए दूरसंचार विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पात्रता मानदंड और आवेदन दिशानिर्देशों के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया दूरसंचार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाने के लिए यहाँ पर क्लिक करें।
नयी दिल्ली। तमिलनाडु के राज्यपाल रवींद्र नारायण रवि (आर. एन. रवि) ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इसकी जानकारी पीएम ऑफिस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर दी।
तमिलनाडु के वर्तमान राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं। इन्होने 1 अगस्त 2019 से 9 सितंबर 2021 तक नागालैंड के राज्यपाल और 18 दिसंबर 2019 से 26 जनवरी 2020 तक मेघालय के राज्यपाल के रूप में कार्य किया ।
इनका जन्म बिहार के पटना में हुआ था और उन्होंने 1974 में भौतिकी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। पत्रकारिता में एक संक्षिप्त कार्यकाल के बाद, वह 1976 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हो गए और उन्हें केरल कैडर आवंटित किया गया, जहाँ उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक सेवा की। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में अपने कार्यकाल के दौरान , रवि ने खनन माफियाओं सहित संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कई भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया।
कोयला मंत्रालय (Coal Ministry) ने आज 7वें दौर के दूसरे प्रयास के अंतर्गत नीलाम की गई तीन कोयला खदानों के लिए कोयला खनन विकास और उत्पादन समझौतों को सफलतापूर्वक निष्पादित किया। यह वाणिज्यिक कोयला खनन की सफलता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। तीन खदानों में से दो आंशिक रूप से खोजी गई हैं, जबकि एक पूरी तरह अन्वेषित है।
समझौते किए गए खदानों हैं मच्छकटा (संशोधित) कोयला खदान, कुडनाली लुबरी कोयला खदान और सखीगोपाल-बी काकुरही कोयला खदान। सफल बोलीकर्ता क्रमशः एनएलसी इंडिया लिमिटेड, गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और तमिलनाडु जेनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड हैं।
इन तीन खदानों से वाणिज्यिक नीलामी के अंतर्गत अनुमानित वार्षिक राजस्व सृजन लगभग 2,991.20 करोड़ रुपए है, जो लगभग 30.00 एमटीपीए की कुल पीक रेट क्षमता उत्पादन पर आधारित है। इन खदानों के चालू होने पर लगभग 40,560 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, इन कोयला खदानों को चालू करने के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपए का कुल निवेश आवंटित किया जाएगा।
यह पहल कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, आर्थिक विकास, रोजगार सृजन में योगदान देने और राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।