Maharaja Surajmal Jat: वीरता, नेतृत्व और न्याय की अनुपम गाथा, Episode-1

Maharaja Surajmal: वीरता, नेतृत्व और न्याय की अनुपम गाथा, Episode-1

13 फरवरी 1707, को राजस्थान के भरतपुर मैं जाट कुल मैं जन्मे हिन्दू महाराजा सूरजमल (Maharaja Surajmal) या सुजान सिंह अपने समय के वीर योद्धा और रणनीतिकार थे। उनका शासन जिन क्षेत्रों में था वे वर्तमान समय में भारत की राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़, फ़िरोज़ाबाद, एटा, राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर, हरियाणा का गुरुग्राम, रोहतक, झज्जर, फरीदाबाद, रेवाड़ी, मेवात हैं। राजा सूरजमल में वीरता, धीरता, गम्भीरता, उदारता, सतर्कता, दूरदर्शिता, सूझबूझ, चातुर्य और राजमर्मज्ञता का सुखद संगम सुशोभित था। मेल-मिलाप और सह-अस्तित्व तथा समावेशी सोच को आत्मसात करने वाली भारतीयता के वे सच्चे प्रतीक थे। राजा सूरज मल के समकालीन एक इतिहासकार ने उन्हें ‘जाटों का प्लेटो’ कहा है। इसी तरह एक आधुनिक इतिहासकार ने उनकी दूरदृष्टि और बुद्धिमत्ता को देखने हुए उनकी तुलना ओडिसस से की है।

महाराजा सूरजमल (Maharaja Surajmal) के जीवन परिचय और उनके शासनकाल मैं किये गए उत्कृष्ट कार्यों और उनके द्वारा लाडे गए भीषण युद्धों पर प्रकाश डालने का प्रयत्न करते हुए, जाट बुलेटिन प्रस्तुत करते हैं महाराजा सूरजमल के जीवन परिचय और उनकी वीरगाथा का प्रथम भाग।

Maharaja Surajmal: वीरता, नेतृत्व और न्याय की अनुपम गाथा, Episode-1

कृपया ऊपर दिए हुए लिंक पर जाएँ अथवा नीचे दी गयी वीडियो को देखें। ये 3 मिनट की वीडियो जाटों के इतिहास और भारत के इस वीर योद्धा के शौर्य और संस्कार को दर्शाने की दिशा में हमारा पहला कदम है। अगर वीडियो अच्छी लगे तो like करें, subscribe करें और सभी को share करना न भूलें।

महाराजा सूरजमल जाट (Maharaja Surajmal) भारतीय इतिहास के उन योद्धाओं और शासकों में से एक हैं जिन्होंने अपनी सैन्य कुशलता, रणनीतिक बुद्धिमत्ता और प्रजा के प्रति न्यायप्रियता के साथ एक अमिट छाप छोड़ी। वे न केवल भरतपुर राज्य के संस्थापक थे, बल्कि उन्होंने जाट समुदाय को संगठित कर उन्हें भारतीय इतिहास में सम्मानजनक स्थान दिलाया। उनका जीवन और शासनकाल साहस, त्याग और रणनीतिक कौशल का प्रतीक है।


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Pushkar Mela 2024: राजस्थान की रंग बिरंगी संस्कृति की एक झलक, जाने क्या है खास ?

Pushkar Mela 2024: राजस्थान की रंग बिरंगी संस्कृति की एक झलक, जाने क्या है खास ?

पधारो म्हारे देस, जी हाँ अगर आप राजस्थान (मेवाड़) की संस्कृति को करीब से देखना और महसूस करना चाहते हैं तो आपको पुष्कर मैं हर साल आयोजित होने वाले सबसे बड़े पुष्कर मेले मैं जरूर शामिल होना चाहिए। विश्व प्रसिद्द पुष्कर मेले (Pushkar Mela) मैं आपको राजस्थान के कल्चर, हस्तशिल्प, उम्दा नस्ल के ऊँट और घोड़ों के साथ ही पारम्परिक राजस्थानी वेशभूषा व खानपान अनोखा संगम देखने को मिलेगा। दीपावली के पर्व की समाप्ति के साथ ही और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पुष्कर शहर, जो कि राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित एक पवित्र और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर है, मैं सबसे बड़े पशु मेले जिसे पुष्कर मेला के नाम से जाना जाता है की शुरुवात हो जाती है।

पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर

पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर भारत का एकमात्र प्रमुख मंदिर है जो भगवान ब्रह्मा को समर्पित है। यह मंदिर राजस्थान के पुष्कर शहर में पवित्र पुष्कर झील के पास स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने यहां यज्ञ किया था, जिससे इस स्थान को धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व मिला। संगमरमर और चांदी से बना यह मंदिर अपनी सुंदर नक्काशी और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। कार्तिक पूर्णिमा के दौरान, यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं और पुष्कर झील में स्नान करके मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।

पुष्कर मेला (Pushkar Mela) 2024 आयोजन

सात दिवसीय पुष्कर मेले की शुरुवात 09-11-2024 से होगी और 15-11-2024 को कार्तिक पूर्णिमा पर इसका समापन होगा। हालाँकि मेला चार पांच दिन पहले ही शुरू हो जाता है और समापन के दो तीन दिन बाद तक चलता है।

पुष्कर मेला (Pushkar Mela) 2024 के प्रमुख आकर्षण

  1. ऊंट मेला और प्रतियोगिताएं: पुष्कर मेला में ऊंटों की सजावट, दौड़, और ऊंटों की खरीद-बिक्री का आयोजन होता है। यहां का ऊंट मेला दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ऊंटों की दौड़ और उनकी सजावट प्रतियोगिता को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। साथ ही उम्दा नस्ल के घोड़े और अन्य पशु भी मेले का आकर्षण बढ़ाएंगे।
  2. लोक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम: पुष्कर मेला राजस्थान की कला और संस्कृति का प्रतीक है। यहां कालबेलिया, घूमर और गेर जैसे पारंपरिक नृत्य होते हैं, जिसमें लोक संगीत की धुन पर नर्तक अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
  3. हस्तशिल्प और हस्तनिर्मित वस्त्र बाजार: पुष्कर मेला का बाजार भी बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर राजस्थान के पारंपरिक हस्तशिल्प, आभूषण, कपड़े और सजावट की वस्तुएं उपलब्ध होती हैं। इस बाजार में विदेशी पर्यटक भी काफी खरीदारी करते हैं।
  4. हॉट एयर बैलून राइड: पुष्कर मेला में हॉट एयर बैलून की सवारी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है। इससे पूरे पुष्कर शहर और मेले का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है।
  5. विभिन्न प्रतियोगिताएं: पगड़ी प्रतियोगिता, मूँछ प्रतियोगिता, तिलक प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता, मटका दौड़, मैराथन, विदेशी पर्यटकों के साथ रस्साकशी, कुश्ती और कबड्डी प्रतियोगिता आदि शामिल हैं।
  6. लाइव कॉन्सर्ट: विभिन्न सेलिब्रिटीज द्वारा गीत संगीत के लाइव कॉन्सर्ट मैं प्रस्तुति दी जाएगी।
  7. पुष्कर झील में स्नान: मेले के दौरान पुष्कर झील में स्नान का विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां स्नान करने से पवित्रता की प्राप्ति होती है।
  8. अन्नकूट उत्सव: कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां अन्नकूट का आयोजन होता है, जिसमें भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं। यह पर्व मेले में धार्मिक भावना और संस्कृति का एक प्रमुख आकर्षण है।
  9. सरोवर घाट पर महाआरती तथा आतिशबाजी का प्रदर्शन: मेले के समापन पर ब्रह्म सरोवर घाट पर महाआरती तथा आतिशबाजी का प्रदर्शन किया जायेगा।

पुष्कर कैसे पहुंचें

पुष्कर तक पहुंचने के लिए निम्नलिखित साधनों का उपयोग कर सकते हैं:

  1. वायु मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा किशनगढ़ (40 किमी) और जयपुर (150 किमी) है। जयपुर से पुष्कर तक टैक्सी या बस आसानी से मिल जाती है।
  2. रेल मार्ग: अजमेर रेलवे स्टेशन पुष्कर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो 15 किमी दूर है। यहां से टैक्सी या बस से पुष्कर तक पहुंच सकते हैं।
  3. सड़क मार्ग: राजस्थान के सभी प्रमुख शहरों और दिल्ली से सीधी बस सेवा उपलब्ध है। टैक्सी और निजी वाहन से भी पुष्कर तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

पुष्कर मैं ठहरने के स्थान

पुष्कर में ठहरने के लिए कई प्रकार के विकल्प उपलब्ध हैं, जो सभी बजट और सुविधाओं के अनुरूप हैं, साथ ही आप अजमेर मैं भी लक्ज़री एवं बजट होटल, गेस्ट हाउस तथा धर्मशाला मैं आसानी से ठहर सकते हैं, पर मेले मैं दूरदराज से और देश विदेश से आने वाले पर्यटकों के मद्देनजर एडवांस बुकिंग करवा लेना बेहतर विकल्प साबित होगा।

  1. लक्जरी होटल: पुष्कर मैं कई लक्ज़री होटल और रिसोर्ट हैं जो आपको शानदार सुविधाओं के साथ आरामदायक प्रवास प्रदान करते हैं।
  2. बजट होटल और गेस्ट हाउस: छोटे बजट में रहने के लिए होटल और गेस्ट हाउस जैसे अतिथि गृह उपलब्ध हैं।
  3. कैम्पिंग और टेंट स्टे: पुष्कर मेला के दौरान कैम्पिंग साइट्स में ठहरने का अनोखा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।
  4. धार्मिक धर्मशालाएं: श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों और धर्मशालाओं में भी ठहरने की व्यवस्था है।

पुष्कर मेला (Pushkar Mela) राजस्थान की संस्कृति और परंपरा को देखने का बेहतरीन अवसर है। यहां हर साल लाखों लोग आते हैं और इस रंग-बिरंगे उत्सव का हिस्सा बनते हैं। अगर आप भी राजस्थान की इस अनोखी संस्कृति का आनंद लेना चाहते हैं, तो पुष्कर मेला (Pushkar Mela) 2024 में जरूर शामिल हों।


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अब सफाई कर्मियों को फेफड़े, किडनी एवं त्वचा सम्बंधित बीमारियों के लिए मिलेगा निशुल्क पैकेज: राजकुमारी दिया

RGHS के अंतर्गत अब सफाई कर्मियों को फेफड़े, किडनी एवं त्वचा सम्बंधित बीमारियों के लिए राज्य सरकार से मिलेगा निशुल्क पैकेज।

राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य के परिवर्तित बजट 2024-25 पर सामान्य वाद-विवाद के बाद राज्य सरकार की ओर से उत्तर प्रस्तुत करते हुए उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य से जुड़ी नवीन घोषणा की।

इस बारे मैं राजस्थान सरकार के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से ये जानकारी साझा की गयी जिसमे अन्य घोषणाओं के बारे मैं भी बताया गया।